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AI हमारी सोचने की क्षमता को कैसे बदल रहा है: न्यूरोसाइंटिस्ट की चेतावनी

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· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: news.un.org

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मुख्य बातेंजैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरण दैनिक जीवन का हिस्सा बन रहे हैं, न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. डेविड रॉक ने चेतावनी दी है कि सबसे बड़ा खतरा तकनीक की ताकत नहीं, बल्कि हमारी सोच को उस पर सौंपने की प्रवृत्ति है। संयुक्त राष्ट्र स्किल्स फेस्ट 2026 (UN Skills Fest 2026) से पहले, जिसका विषय 'लोग केंद्र में' है, डॉ. रॉक ने AI पर अत्यधिक निर्भरता के मनोवैज्ञानिक…
AI is changing the way we think. The question is whether we’ll notice in time

चित्र: UN News · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation

जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरण दैनिक जीवन का हिस्सा बन रहे हैं, न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. डेविड रॉक ने चेतावनी दी है कि सबसे बड़ा खतरा तकनीक की ताकत नहीं, बल्कि हमारी सोच को उस पर सौंपने की प्रवृत्ति है। संयुक्त राष्ट्र स्किल्स फेस्ट 2026 (UN Skills Fest 2026) से पहले, जिसका विषय 'लोग केंद्र में' है, डॉ. रॉक ने AI पर अत्यधिक निर्भरता के मनोवैज्ञानिक परिणामों पर प्रकाश डाला।

'AI FOMO' से 'AI हैंगओवर' तक का सफर

संगठनों ने बिना दीर्घकालिक प्रभावों को समझे तेजी से जनरेटिव AI को अपनाया है। डॉ. रॉक इसे प्रारंभिक डर से 'AI हैंगओवर' में बदलाव बताते हैं। जबकि कुछ कर्मचारी नियमित कार्यों को कम करने के लिए AI का उपयोग करते हैं, अधिकांश लोग इसके विपरीत कर रहे हैं।

  • ऊर्जा की बचत: मानव मस्तिष्क प्राकृतिक रूप से ऊर्जा बचाना चाहता है, जिससे सोचे बिना काम चलाना आकर्षक लगता है।
  • निर्णय क्षमता का क्षरण: विश्लेषण और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बाहर भेजने से अच्छे और बुरे विचारों में अंतर करने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
  • गति बनाम बुद्धिमत्ता: AI तेजी से उत्तर देता है, लेकिन गति बुद्धिमत्ता के समान नहीं है।

सूचना अतिभार और मानवीय सीमाएं

आज के कर्मचारियों को जानकारी की कमी नहीं, बल्कि उसकी अधिकता का सामना करना पड़ रहा है। संदेश, अपडेट और AI-तैयार सारांश मानव क्षमता से परे मानसिक मांग पैदा करते हैं। डॉ. रॉक इस दौर की तुलना ऑटोमोबाइल के शुरुआती दिनों से करते हैं, जहां तकनीक सामाजिक मानदंडों से आगे निकल गई है।

रिश्तों में बदलाव और संगति

पिछली तकनीकों के विपरीत, AI ध्यान के साथ-साथ मानवीय संबंधों के लिए भी प्रतिस्पर्धा कर रहा है। लोग बातचीत और सलाह के लिए चैटबॉट का रुख कर रहे हैं। शोध से संकेत मिलता है कि AI साथियों पर अत्यधिक निर्भरता अकेलेपन को बढ़ा सकती है।

व्यावहारिक निहितार्थ और सत्यापन

  • मस्तिष्क को सक्रिय रखें: विचारों का परीक्षण करने के लिए AI का उपयोग करें, लेकिन निर्णय लेने की जिम्मेदारी अपने पास रखें।
  • मानع नेतृत्व (Human in the Lead): नियंत्रण बनाए रखें और मेटाकॉग्निटिव सोच का अभ्यास करें।
  • सत्यापन: मूल संदर्भ और बयानों की पुष्टि के लिए संयुक्त राष्ट्र समाचार पोर्टल (UN News) और न्यूरो लीडरशिप इंस्टीट्यूट के आधिकारिक प्रकाशनों की जांच करें।

डॉ. डेविड रॉक न्यूरोलीडरशिप इंस्टीट्यूट के सह-संस्थापक और सीईओ हैं।

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मूल स्रोत पढ़ें: AI is changing the way we think. The question is whether we’ll notice in time - UN News

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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