आरबीआई रिपोर्ट: चलन में मौजूद मुद्रा की वृद्धि पांच साल के उच्चतम स्तर पर
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.business-standard.com

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भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट का अवलोकन
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई "स्टेट ऑफ द इकोनॉमी" रिपोर्ट के अनुसार, चलन में मौजूद मुद्रा (CiC) की वृद्धि दर पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट में इस वृद्धि का मुख्य कारण फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) योजनाओं के तहत आए जमा को बताया गया है, जिससे आरक्षित मुद्रा में मजबूत विस्तार हुआ है।
मुख्य आंकड़े और डेटा बिंदु
रिपोर्ट में जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार:
- 15 अक्टूबर तक चलन में कुल मुद्रा ₹43.46 लाख करोड़ थी, जो साल-दर-साल 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाती है।
- आरक्षित मुद्रा साल-दर-साल 10.3 प्रतिशत बढ़कर ₹53.24 लाख करोड़ हो गई।
- 30 सितंबर को समाप्त पखवाड़े के दौरान CiC की वृद्धि 13.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
- 8 जून को शुरू की गई विशेष डॉलर-रुपया फॉरेक्स-स्वैप सुविधा के तहत बैंकों ने 31 अगस्त तक $133 अरब के एफसीएनआर (बी) जमा जुटाए।
विश्लेषक की राय और तरलता का दृष्टिकोण
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्रीय बैंक द्वारा तरलता को नियंत्रित करने के साथ ही आरक्षित मुद्रा की वृद्धि में नरमी आने की उम्मीद है। आईडीबीआई फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता के अनुसार, आरक्षित मुद्रा में तेजी वित्त वर्ष 2026 से आरबीआई द्वारा किए गए संचयी तरलता संभरण को दर्शाती है।
विशेष विशेषज्ञों का अनुमान है कि निरंतर विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप और त्योहारी सीजन के दौरान मुद्रा की मांग बढ़ने से तरलता और सख्त होगी, जिससे आरक्षित मुद्रा की वृद्धि मध्यम हो जाएगी।
व्यापक आर्थिक संकेतक
आरबीआई रिपोर्ट में व्यापक आर्थिक स्थिति पर भी प्रकाश डाला गया है:
- भारतीय उच्च-आवृत्ति संकेतकों ने वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता दिखाई है।
- शुद्ध ऊर्जा आयातक होने के बावजूद घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र ने सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को समर्थन देना जारी रखा है।
- खुदरा महंगाई में कुछ वस्तुओं की ओर फैलाव के संकेत मिले हैं, जिस पर मौद्रिक नीति के तहत ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
- एफसीएनआर (बी) प्रवाह, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और प्रेषण ने विदेशी भंडार को मजबूत किया है, जबकि सितंबर में मजबूत निर्यात वृद्धि से व्यापार घाटा कम हुआ है।
कैसे करें सत्यापन
पाठक और शोधकर्ता भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर "स्टेट ऑफ द इकोनॉमी" रिपोर्ट और उससे जुड़े मासिक बुलेटिन को देखकर इन आंकड़ों का सत्यापन कर सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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