केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.business-standard.com

चित्र: Business Standard — Creative Commons
बैंकिंग सुधार समिति का गठन
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने देश के बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा करने और इसके लिए संरचनात्मक, विनियामक और विधाई सुधारों की सिफारिश करने के वास्ते एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। इस समिति की घोषणा सबसे पहले केंद्रीय बजट में की गई थी।
समिति का नेतृत्व और संरचना
इस उच्चस्तरीय समिति के प्रमुख पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) सुरेश एन. पटेल होंगे। पटेल के पास बैंकिंग क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है और वह पहले आंध्रा बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं।
समिति के अन्य सदस्यों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीश चंद्र मुर्मू, इंडियन बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद्मजा चूंडुरु, तथा रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन शामिल हैं। वित्तीय सेवा विभाग में बैंकिंग मामलों के संयुक्त सचिव इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
प्रमुख कार्य और कार्यक्षेत्र
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, समिति को अपना काम पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। समिति के मुख्य कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण (PSL) की समीक्षा: समिति प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग और लीड बैंक योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और समन्वय का आकलन करेगी।
- पूंजी आवश्यकताएं: यह बैंकों, विकास वित्त संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की पूंजी आवश्यकताओं का आकलन कर वित्तपोषण के स्रोतों की सिफारिश करेगी।
- नियामक और कानूनी ढांचे: वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा विनियामक और कानूनी ढांचे की समीक्षा की जाएगी।
- डिजिटल और तकनीकी सुधार: समिति बैंकिंग संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल नवाचार को अपनाने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी, साथ ही साइबर जोखिमों से सुरक्षा के उपायों पर भी ध्यान देगी।
उद्योग की प्रतिक्रिया और आगामी कदम
विभिन्न वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने इस समीक्षा को महत्वपूर्ण बताया है। उद्योग जानकारों का मानना है कि यह समिति दीर्घकालिक पूंजी आवश्यकताओं, निजी निवेश को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय बैंक तैयार करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने में मदद करेगी।
इस घोषणा की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए संबंधित वित्त मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट और जारी प्रेस विज्ञप्तियों का अवलोकन किया जा सकता है।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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