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जलवायु परिवर्तन का असर: नॉर्वे के इस सुदूर इलाके में पिघलती बर्फ ने बढ़ाई पीने के पानी की चिंता

· GlobeWire Daily Climate Desk · Source: www.theguardian.com

जलवायु परिवर्तन का असर: नॉर्वे के इस सुदूर इलाके में पिघलती बर्फ ने बढ़ाई पीने के पानी की चिंता

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons

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मुख्य बातेंनॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप समूह स्थित लोंगइयरबिएन (Longyearbyen) गांव में निवासियों को नल का पानी पीने से रोक दिया गया है। वैज्ञानिकों ने इसका कारण जलवायु परिवर्तन के कारण पर्माफ्रॉस्ट (पूरी साल जमी रहने वाली मिट्टी और चट्टान) का पिघलना बताया है। उत्तरी ध्रुव से 800 मील

नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप समूह स्थित लोंगइयरबिएन (Longyearbyen) गांव में निवासियों को नल का पानी पीने से रोक दिया गया है। वैज्ञानिकों ने इसका कारण जलवायु परिवर्तन के कारण पर्माफ्रॉस्ट (पूरी साल जमी रहने वाली मिट्टी और चट्टान) का पिघलना बताया है। उत्तरी ध्रुव से 800 मील दूर स्थित इस क्षेत्र में तापमान दुनिया की औसत दर से पांच से सात गुना तेजी से बढ़ रहा है।

पानी में भारी धातुओं का संक्रमण

लोंगइयरबिएन अपनी मुख्य पेयजल आपूर्ति 'इसडाममेन' (Isdammen) नामक ढाई किलोमीटर लंबी झील से प्राप्त करता है। तापमान में वृद्धि के कारण पर्माफ्रॉस्ट पिघल गया है, जिससे नई खुली हुई चट्टानें झील में भारी धातुएं छोड़ रही हैं।

स्वालबार्ड यूनिवर्सिटी सेंटर की आर्कटिक भूविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर मार्जोलेन वेरेट के अनुसार, पिघलती पर्माफ्रॉस्ट और शेल बेसराॅक (जिसमें पाइराइट नामक खनिज होता है) के संयोजन से यह प्रदूषण फैल रहा है। पाइराइट जब पानी और ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो यह ऑक्सीकृत होकर अम्लता (acidity) पैदा करता है, जिससे चट्टानों से मैंगनीज और निकल जैसी भारी धातुएं जलमार्गों में रिसने लगती हैं।

स्थानीय प्रशासन और नागरिकों पर प्रभाव

नगर पालिका (Longyearbyen lokalstyre) ने सितंबर में पानी में मैंगनीज का स्तर नॉर्वे के लोक स्वास्थ्य संस्थान द्वारा अनुशंसित सीमा से 25 गुना अधिक पाए जाने के बाद अपने 2,600 निवासियों को चेतावनी जारी की थी। मैंगनीज के लंबे समय तक संपर्क में रहने से विशेष रूप से बच्चों और शिशुओं में तंत्रिका संबंधी समस्याएं (neurological problems) हो सकती हैं।

राहत के लिए आपातकालीन उपाय किए गए हैं, जिसमें स्थानीय ब्रुअरी द्वारा फ़िल्टर किए गए शुद्ध पानी का एक केंद्रीय टैंक स्थापित करना शामिल है ताकि निवासी सुपरमार्केट में अपने बर्तन भर सकें। हालांकि मैंगनीज का स्तर कम हो गया है, लेकिन इस साल की शुरुआत में सल्फेट और निकल का स्तर भी अनुशंसित सीमा से अधिक पाया गया, जिसके कारण प्रतिबंध अभी भी लागू है।

व्यावहारिक निहितार्थ और आगे की राह

महापौर तेर्जे औनेविक ने कहा है कि पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया गया है और एक पूरी तरह से नई जल आपूर्ति प्रणाली की आवश्यकता हो सकती है। संभावित समाधानों में झील में एक निस्पंदन (filtration) प्रणाली स्थापित करना और बैकअप के रूप में एक डिसेलिनेशन प्लांट लगाना शामिल है। हालांकि, अत्यधिक ठंड और तकनीकी चुनौतियों के कारण यह प्रक्रिया बेहद महंगी और कठिन होगी।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आर्कटिक के अन्य समुदायों, जैसे उत्तरी कनाडा और अलास्का में भी इस तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं।

मूल घोषणा और विस्तृत जानकारी के लिए पाठक [द गार्डियन की रिपोर्ट](https://www.theguardian.com/environment/2026/oct/19/tap-water-no-longer-drinkable-norwegian-town-climate-related-thawing-heavy-metals-arctic-longyearbyen-svalbard) का अवलोकन कर सकते हैं।

मूल स्रोत पढ़ें: Tap water no longer drinkable in Norwegian village as climate-related thawing releases heavy metals

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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