चार साल पहले हुआ था ऐतिहासिक समझौता, क्या प्रकृति को बचाने का वह वैश्विक संकल्प विफल हो रहा है?
· GlobeWire Daily Climate Desk · Source: www.theguardian.com

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons
ऐतिहासिक समझौते पर मंडराता संकट
चार साल पहले वर्ष 2022 के अंत में, कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया भर की सरकारों ने जैव विविधता की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस महत्वाकांक्षी समझौते का उद्देश्य दुनिया के तेजी से लुप्त हो रहे वन्यजीवों और प्राकृतिक आवासों को बचाना था। समझौते के तहत पृथ्वी के 30% हिस्से को संरक्षित करने, लगभग एक तिहाई सबसे खराब स्थिति वाले पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करने और कम से कम 500 अरब डॉलर की पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सब्सिडी में सुधार करने जैसे अहम लक्ष्य तय किए गए थे।
हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया भर की सरकारें इन लक्ष्यों को पूरा करने में भारी पिछड़ रही हैं। 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन के बाद से संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन के तहत प्रकृति से जुड़ा कोई भी लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सका है, और वर्तमान संकेतों के अनुसार इस बार भी अधिकांश लक्ष्यों के पूरा होने की संभावना बेहद कम है।
अर्मेनिया में कोप17 (Cop17) बैठक और वैश्विक चिंताएं
इसी पृष्ठभूमि में, इस सप्ताह देश आर्मेनिया के येरेवान में कोप17 (Cop17) सम्मेलन के लिए एकत्रित हो रहे हैं ताकि यह तय किया जा सके कि आगे क्या कदम उठाए जाएं। शिखर सम्मेलन से पहले जारी एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि दुनिया इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के मार्ग से बहुत दूर है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि प्रकृति के खिलाफ युद्ध समाप्त नहीं हुआ है और केवल अच्छी नीयत से प्रकृति जीवित नहीं रह सकती। उन्होंने विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सब्सिडी को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ब्रिटेन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर महत्वाकांक्षी बातें कहने और जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करने के बीच एक बड़ा अंतर बना हुआ है। ब्रिटेन के पर्यावरण संरक्षण नियमों, वर्षा वन संरक्षण के लिए मिलने वाली सहायता राशि और समुद्री संरक्षित क्षेत्रों में बॉटम ट्रॉलिंग पर प्रतिबंध जैसी नीतियों में ढील दिए जाने की आलोचना की गई है। वहीं, ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि उन्होंने जलवायु लचीलेपन और प्रकृति की रिकवरी के लिए 7 अरब पाउंड के वित्तपोषण का समर्थन किया है और जल प्रदूषण से निपटने के लिए नए अधिकार लागू किए हैं।
राजनीतिक और वित्तीय बाधाएं
इस वैश्विक संकट के पीछे राजनीतिक विरोध और फंडिंग की कमी मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देशों में नाइट्रोजन प्रदूषण को नियंत्रित करने के यूरोपीय संघ के प्रयासों के खिलाफ बड़े पैमाने पर किसानों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, जिससे प्रकृति बहाली कानून (nature restoration law) को लेकर राजनीतिक गतिरोध पैदा हुआ। इसके अलावा, अमेरिका में राजनीतिक बदलावों और कई यूरोपीय देशों द्वारा सहायता राशि में कटौती के कारण संरक्षण परियोजनाओं को मिलने वाली फंडिंग पर भी गंभीर असर पड़ा है। उदाहरण के लिए, निजी क्षेत्र की भागीदारी से शुरू किए गए नए फंड, जिनसे भारी मात्रा में धन जुटाने की उम्मीद थी, अब तक केवल नाममात्र की राशि ही जुटा पाए हैं।
कुछ सकारात्मक पहल और उम्मीद की किरण
भले ही वैश्विक स्तर पर प्रगति धीमी हो, लेकिन कुछ सकारात्मक उदाहरण भी सामने आए हैं। कई देशों ने भूमि संरक्षण से जुड़े '30x30' लक्ष्य के भू-भाग वाले हिस्से को पूरा करने की दिशा में प्रगति की है और कई क्षेत्रों में स्वदेशी भू-भागों को औपचारिक रूप दिया गया है। फ्रेंच पोलिनेशिया ने बड़े नए समुद्री पार्क स्थापित किए हैं, और कजाकिस्तान जैसे देशों ने कैस्पियन टाइगर को वापस लाने के लिए पुनर्वनलीकरण (rewilding) के बड़े प्रयास शुरू किए हैं।
व्यावहारिक निहितार्थ और पाठकों के लिए जानकारी
- पुष्टि किए गए तथ्य: 2022 में मॉन्ट्रियल समझौते के तहत तय किए गए लक्ष्य, अर्मेनिया में कोप17 (Cop17) बैठक का आयोजन, और संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस की सब्सिडी खत्म करने की चेतावनी।
- अनिश्चितताएं: क्या देश इस दशक के अंत तक अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा कर पाएंगे या नहीं, यह अभी भी अनिश्चित है।
- पाठक क्या सत्यापित कर सकते हैं: पाठक मूल वैश्विक रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों के लिए गार्जियन (The Guardian) के पर्यावरण अनुभाग और आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलनों की घोषणाओं की जाँच कर सकते हैं।
मूल स्रोत और विस्तृत कवरेज के लिए, पाठक [द गार्जियन की मूल रिपोर्ट](https://www.theguardian.com/environment/2026/oct/19/can-countries-deliver-on-a-deal-to-save-the-worlds-plants-and-animals) देख सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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