पर्यावरण

वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने के लिए अगले चार वर्षों में उत्सर्जन में 18% की भारी कटौती अनिवार्य: संयुक्त राष्ट्र

· GlobeWire Daily Climate Desk · Source: www.theguardian.com

वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने के लिए अगले चार वर्षों में उत्सर्जन में 18% की भारी कटौती अनिवार्य: संयुक्त राष्ट्र — featured illustration or credited source image

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons

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मुख्य बातें जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चेतावनी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को लेकर एक स्पष्ट और चिंताजनक चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष

जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को लेकर एक स्पष्ट और चिंताजनक चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को बनाए रखने की संभावना अब लगभग समाप्त हो चुकी है। अब दुनिया के सामने चुनौती यह है कि वह तापमान में होने वाली इस अत्यधिक वृद्धि को कैसे कम से कम करे। जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमें विनाशकारी परिणामों से बचना है, तो अगले चार वर्षों में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 18% और एक दशक के भीतर 45% की कटौती करनी होगी।

वर्तमान स्थिति और भविष्य का जोखिम

UNEP की रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि पिछले साल उत्सर्जन स्तर लगभग स्थिर रहा है, लेकिन इसे सुधार के संकेत के रूप में नहीं देखा जा सकता। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और जीवाश्म ईंधन पर बढ़ती निर्भरता इस प्रगति के लिए बड़े खतरे हैं। यदि वर्तमान नीतियां जारी रहीं, तो सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है, जो पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी सिद्ध होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि हर पांच साल तक वर्तमान स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, तापमान पूर्वानुमान में 0.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि करता है। यह न केवल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पैदा करेगा, बल्कि जलवायु प्रणाली में उन 'टिपिंग पॉइंट्स' को सक्रिय कर सकता है, जिनसे वापसी संभव नहीं होगी।

राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विज्ञान के पास समाधान मौजूद हैं। सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन सरकारों की नीतियां उनके द्वारा किए गए वादों से काफी पीछे हैं। विशेष रूप से अमेरिका और सऊदी अरब जैसे प्रमुख जीवाश्म ईंधन उत्पादक देशों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। अमेरिका का पेरिस समझौते से हटने का निर्णय और वैश्विक स्तर पर कमजोर प्रतिज्ञाएं इस संकट को और गहरा रही हैं।

अनिश्चितताएं और आगे की राह

2028 में होने वाले 'ग्लोबल स्टॉकटेक' के जरिए देशों के उत्सर्जन लक्ष्यों की समीक्षा की जानी है, लेकिन हाल ही में IPCC (जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल) की रिपोर्टों के प्रकाशन को लेकर हुए विवादों ने इस प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर दिया है। वैज्ञानिक अब मीथेन उत्सर्जन में तेजी से कटौती को तापमान वृद्धि को सीमित करने का एक प्रभावी उपकरण मान रहे हैं।

पाठक इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की आधिकारिक वेबसाइट पर रिपोर्ट देख सकते हैं। यह संकट अब केवल वैज्ञानिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक और तात्कालिक कार्रवाई का प्रश्न है।

स्रोत: [https://www.theguardian.com/environment/2026/oct/21/world-cut-emissions-un-climate-crisis](https://www.theguardian.com/environment/2026/oct/21/world-cut-emissions-un-climate-crisis)

मूल स्रोत पढ़ें: World must cut emissions by 18% in four years ‘to find our way back’, UN says - The Guardian

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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