पर्यावरण

नॉर्वे का यह गांव बन रहा है दुनिया की सबसे तेजी से गर्म होने वाली जगहों में एक, जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकट

· GlobeWire Daily Climate Desk · Source: www.theguardian.com

नॉर्वे का यह गांव बन रहा है दुनिया की सबसे तेजी से गर्म होने वाली जगहों में एक, जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकट

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons

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मुख्य बातें आर्कटिक का तेजी से बदलता स्वरूप और लॉन्गइयरब्येन गांव नॉर्वे के दूरदराज के स्वालबार्ड द्वीप समूह पर स्थित लॉन्गइयरब्येन गांव दुनिया की सबसे तेजी से गर्म होने वाली जगहों में शामिल है। यहां तापमान वैश्विक औसत से सात गुना तेजी से बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में भूमि का 57 प्र

आर्कटिक का तेजी से बदलता स्वरूप और लॉन्गइयरब्येन गांव

नॉर्वे के दूरदराज के स्वालबार्ड द्वीप समूह पर स्थित लॉन्गइयरब्येन गांव दुनिया की सबसे तेजी से गर्म होने वाली जगहों में शामिल है। यहां तापमान वैश्विक औसत से सात गुना तेजी से बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में भूमि का 57 प्रतिशत हिस्सा ग्लेशियरों से ढका हुआ है, लेकिन अब ये ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं और पिघल रहे हैं। वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, फॉक्सफोना जैसे छोटे ग्लेशियरों में बर्फ जमा होने के बजाय बारिश अधिक हो रही है, जिससे उनका आकार तेजी से घट रहा है।

पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना और बुनियादी ढांचे पर असर

बढ़ते तापमान का असर केवल ग्लेशियरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों से जमी रहने वाली जमीन यानी 'पर्माफ्रॉस्ट' भी अब पिघलने लगी है। इसके कारण इमारतों की नींव हिल रही है, दीवारों में दरारें आ रही हैं और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इन समस्याओं के चलते गांव में आवास की कमी और गंभीर हो गई है, क्योंकि कई घर रहने लायक नहीं बचे हैं।

पीने के पानी में भारी धातुओं का संकट

पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से स्थानीय bedrock (चट्टानों) में मौजूद भारी धातुएं रिसकर गांव के पानी के स्रोतों में मिलने लगी हैं। इसके चलते नल के पानी को जहरीला पाया गया है, और निवासियों को पीने के पानी के लिए सुपरमार्केट में बने केंद्रीय टैंकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन इस दीर्घकालिक समस्या के समाधान के लिए मंथन कर रहा है।

हिमस्खलन की आपदा और सुरक्षा के उपाय

साल 2015 में हुए एक भीषण हिमस्खलन में जानमाल के नुकसान के बाद से इस क्षेत्र में सुरक्षा उपायों को कड़ा किया गया है। यूनिवर्सिटी सेंटर इन स्वालबार्ड (UNIS) के आर्कटिक सेफ्टी सेंटर जैसी संस्थाएं अब जोखिम प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन पर कार्य कर रही हैं। पर्वत पर स्नो फेंस और ट्रैप वॉल लगाए गए हैं, तथा स्थानीय प्रशासन हिमस्खलन चेतावनी प्रणाली के लिए साप्ताहिक आंकड़े जुटा रहा है।

व्यावहारिक निहितार्थ और आगे की राह

यह संकट केवल लॉन्गइयरब्येन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अन्य आर्कटिक क्षेत्रों के लिए भी एक चेतावनी है। स्थानीय मेयर टेर्जे औनेविक और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, गांव के बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति प्रणालियों और निर्माण शैलियों में पूर्ण बदलाव की आवश्यकता है। लकड़ी के निर्माण जो कभी आर्कटिक में सुरक्षित माने जाते थे, अब सड़ने लगे हैं और नई तकनीकों जैसे बेडराॅक में नींव डालने या सर्दियों में ठंडी हवा से जमीन को जमाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

पाठक मूल विवरण और आधिकारिक रिपोर्ट की पुष्टि के लिए 'द गार्डियन' (The Guardian) पर प्रकाशित मूल रिपोर्ट देख सकते हैं: https://www.theguardian.com/environment/2026/oct/21/norway-svalbard-environment-longyearbyen-climate-heating-glacier-permafrost।

मूल स्रोत पढ़ें: This Norwegian village is one of the fastest-warming places on Earth. How can its people save it?

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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