पराली प्रबंधन: भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में पंजाब में आई 93% से अधिक की गिरावट
· GlobeWire Daily Public Services Desk · Source: navbharattimes.indiatimes.com

चित्र: navbharattimes.indiatimes.com — Creative Commons
पंजाब और मध्य प्रदेश के आंकड़ों में अंतर
हर साल सर्दियां शुरू होते ही दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली जलाने का मुद्दा गंभीर बहस का विषय बन जाता है। इस बीच, सरकारी और आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से सामने आया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं पर उल्लेखनीय नियंत्रण पाया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जहां एक ओर पंजाब में फसल अवशेष जलाने के मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसके विपरीत रुझान देखने को मिले हैं, जिससे पराली प्रबंधन की नीतियों पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
आधिकारिक आंकड़े और मशीनरी सब्सिडी योजनाएं
पंजाब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2022 के दौरान पराली जलाने की 49,922 घटनाएं दर्ज की गईं थीं, जो वर्ष 2025 में घटकर 5,114 रह गईं। इसके अलावा, वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में केवल 474 घटनाएं ही सामने आई हैं, जो पिछले वर्षों के मुकाबले लगभग 93 प्रतिशत से अधिक की गिरावट को दर्शाती हैं।
इस बदलाव के पीछे सरकार द्वारा किसानों को उपलब्ध कराई जा रही आधुनिक कृषि मशीनों और सब्सिडी योजनाओं को मुख्य कारण बताया गया है। पंजाब सरकार के कृषि विभाग के अनुसार, 2026 के सीजन में किसानों ने 21,155 फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनें खरीदी हैं। इनमें सुपर सीडर, मल्चर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल ड्रिल, बेलिंग मशीनें और स्ट्रॉ रेक शामिल हैं। व्यक्तिगत किसानों को इन मशीनों पर 50 प्रतिशत से अधिक तथा कस्टम हायरिंग सेंटरों, पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है।
व्यावहारिक और आर्थिक चुनौतियां
कृषि विशेषज्ञों और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच सीमित समय होने के कारण छोटे किसानों के सामने पराली हटाने की बड़ी आर्थिक चुनौती होती है। परिवहन और मजदूरी का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण कई बार किसानों को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ता है। भगवंत मान सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पराली प्रबंधन हेतु 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत मशीनों की उपलब्धता और वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। संगरूर जैसे जिलों में कुछ किसानों द्वारा पराली बेचकर बायो-CNG और बायोगैस परियोजनाओं के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने के उदाहरण भी सामने आए हैं, हालांकि यह बाजार की उपलब्धता और परिवहन लागत पर निर्भर करता है।
मध्य प्रदेश की स्थिति और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
इसके विपरीत, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS कार्यक्रम के बुलेटिन और अन्य आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़े हैं। वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश में 8,160 मामले दर्ज हुए थे, जो बढ़कर 2025 में 17,067 तक पहुंच गए। सितंबर से अक्टूबर 2026 के शुरुआती बुलेटिन में भी मध्य प्रदेश में पंजाब की तुलना में अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं कि क्या अन्य राज्यों में भी किसानों को इसी प्रकार की व्यावहारिक और आर्थिक सहायता मिल रही है या नहीं।
पाठकों के लिए मार्गदर्शिका: क्या है पुष्ट और क्या है अनिश्चित
- पुष्ट तथ्य: पंजाब कृषि विभाग और IARI बुलेटिन के अनुसार पंजाब में 2022 से 2026 के बीच पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है और मध्य प्रदेश में मामले बढ़े हैं। पंजाब सरकार ने CRM मशीनों पर सब्सिडी दी है।
- अनिश्चित और परिवर्तनशील पहलू: पराली से होने वाली किसानों की अतिरिक्त आय बाजार की मांग, परिवहन खर्च और संयंत्रों की उपस्थिति पर निर्भर करती है। उपग्रह से आग की पहचान बादलों के कारण प्रभावित होने की संभावना भी बुलेटिन में दर्ज की गई है।
- सत्यापन का स्रोत: पाठक विस्तृत और आधिकारिक आंकड़ों के लिए [नवभारत टाइम्स की मूल रिपोर्ट](https://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/chandigarh/bhagwant-mann-govt-stellar-work-curbing-stubble-burning-in-punjab-incident-decline-over-93-percent-compared-last-year/articleshow/135138171.cms) और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आधिकारिक बुलेटिन देख सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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