नye अध्ययन का दावा: क्या जीवाश्म ईंधनों के जलने से टल गई थी एक और हिमयुग की शुरुआत?
· GlobeWire Daily Science Desk · Source: www.wired.com

चित्र: Molly Taft — Creative Commons
वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन से यह संकेत मिला है कि बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधनों (fossil fuels) को जलाने के कारण पृथ्वी एक नए हिमयुग (ice age) में प्रवेश करने से बच गई हो सकती है। प्रतिष्ठित जर्नल 'साइंस' में प्रकाशित यह शोध प्राचीन वनस्पति और चट्टान के रिकॉर्ड का उपयोग करके एक बर्फ की चादर के विकास और उसके अचानक पीछे हटने का विश्लेषण करता है। यह बर्फ की चादर उत्तरी अमेरिका के एक बड़े हिस्से को कवर करने वाली प्राचीन बर्फ की चादर का आखिरी अवशेष है।
बार्न्स आइस कैप और इसका इतिहास
यह अध्ययन कनाडा के बैफिन द्वीप (Baffin Island) पर स्थित बार्न्स आइस कैप (Barnes Ice Cap) पर केंद्रित है। निष्कर्षों से पता चलता है कि यह आइस कैप कुछ हजार साल पहले बढ़ना शुरू हुई थी, लेकिन 1960 के दशक से कार्बन प्रदूषण में तेजी आने के बाद इसने तेजी से उलटा रुख करना शुरू कर दिया।
पृथ्वी प्राकृतिक रूप से ऐसे दौर से गुजरती है जहां पृथ्वी के झुकाव और परिक्रमा में प्राकृतिक बदलावों (जिन्हें मिलानकोविच साइकिल कहा जाता है) के कारण उच्च अक्षांशों से बर्फ फैलती है। इसे आमतौर पर 'हिमयुग' कहा जाता है। इसके बाद इंटरग्लेशियल अवधि आती है जहां बर्फ ध्रुवों की ओर पीछे हटती है। आखिरी हिमयुग 12,000 साल पहले समाप्त हुआ था। अपने चरम पर, लॉरेंटाइड आइस शीट (Laurentide Ice Sheet) ने पूरे कनाडा को कवर किया था और न्यूयॉर्क तथा मिडवेस्ट तक फैली हुई थी। यह पीछे हटकर बार्न्स आइस कैप के रूप में सिमट गई।
शोध की पद्धति और निष्कर्ष
सामान्य ग्लेशियरों के विपरीत, बार्न्स आइस कैप अपने बेडरोक पर जमी हुई है, जिससे इसके नीचे उगने वाली वनस्पति का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने 'बेरिलियम-10' (Beryllium-10) का उपयोग करके यह गणना की कि यह आइस कैप पहली बार लगभग 3,600 साल पहले अपने आधुनिक आकार में पहुँची थी। इसके बाद, शोधकर्ताओं ने ग्लेशियर के सामने मौजूद टंडरा क्षेत्र के पौधों—काई (mosses) और लाइकेन—का अध्ययन किया।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लैमोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के पेलोकलामेटोलॉजिस्ट और इस नए पेपर के मुख्य लेखक निकोलस यंग के अनुसार, बर्फ पीछे हटने पर काई उगती है, और जब आइस कैप दोबारा फैलती है तो वह काई को ढककर मार देती है। इन मृत काई के अवशेषों से वैज्ञानिकों को यह पता चला कि ग्लेशियर लगभग 2,000 साल पहले फिर से बढ़ना शुरू हुआ था, जो शायद एक और हिमनदीकरण (glaciation) अवधि की शुरुआत का संकेत हो सकता था।
हालांकि, 1960 के दशक से यह आइस कैप सिकुड़ने लगी। ऐतिहासिक हवाई तस्वीरों से पता चलता है कि 1980 के दशक से बार्न्स आइस कैप के किनारे औसतन हर साल 4 मीटर पीछे हट रहे हैं। यह तेजी से बढ़ते कार्बन उत्सर्जन की अवधि के साथ मेल खाता है।
व्यावहारिक निहितार्थ और अनिश्चितताएं
पुष्टि किए गए तथ्य:
- अध्ययन 'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
- बार्न्स आइस कैप लगभग 3,600 साल पहले अपने आधुनिक आकार में आई थी, फिर लगभग 2,000 साल पहले बढ़ना शुरू हुई, और 1960 के दशक के बाद से यह तेजी से पीछे हट रही है।
- यह बदलाव मानव-प्रेरित कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि के समय के साथ मेल खाता है।
अज्ञात या अनिश्चित पहलू:
- डार्टमाउथ की प्रोफेसर मेरेडिथ केली के अनुसार, हालांकि डेटा स्पष्ट है, लेकिन यह समझने के लिए कि मानव प्रभाव शुरू होने से पहले पृथ्वी पर ग्लेशियर की गति कैसी थी, दुनिया भर के अन्य स्थलों के डेटा से तुलना की आवश्यकता है।
- हिमनदीकरण की शुरुआत करने वाले सटीक तंत्रों पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
पाठक मूल घोषणा की जांच कैसे कर सकते हैं: पाठक इस शोध के बारे में अधिक जानने के लिए 'Science' जर्नल की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं या Wired पर प्रकाशित मूल रिपोर्ट (https://www.wired.com/story/ice-age-beginning-then-humans-started-burning-fossil-fuels/) देख सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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