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मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा बढ़ी, लेकिन क्या लोग मदद ले रहे हैं? विशेषज्ञों ने हेल्थवेल्थ समिट में रखी बात

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मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा बढ़ी, लेकिन क्या लोग मदद ले रहे हैं? विशेषज्ञों ने हेल्थवेल्थ समिट में रखी बात

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मुख्य बातें मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी जागरूकता और वास्तविकता हाल ही में आयोजित हेल्थवेल्ث समिट के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही आज समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत और संवाद पहले से अधिक दिखाई देता

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी जागरूकता और वास्तविकता

हाल ही में आयोजित हेल्थवेल्ث समिट के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही आज समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत और संवाद पहले से अधिक दिखाई देता हो, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि पेशेवर मदद लेने वाले लोगों की संख्या में भी उसी अनुपात में वृद्धि हुई है।

फोर्टिस हेल्थकेयर के डिपार्टमेंट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेज के चेयरपर्सन और डायरेक्टर डॉ. समीर पारिख ने इस बात पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार, आज भी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का सामना करने वाले लगभग तीन-चौथाई लोग पेशेवर मदद नहीं लेते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 25 से 30 वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से मदद मांगने वाले लोगों के अनुपात में कोई बहुत बड़ा या नाटकीय बदलाव नहीं आया है।

इस पैनल चर्चा में दिल्ली साइकियाट्रिक सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. मनुश्री गुप्ता और मनोचिकित्सक एवं डिजिटल मेंटल हेल्थ उद्यमी डॉ. संदीप वोहरा ने भी हिस्सा लिया।

एआई टूल्स की भूमिका और संभावित जोखिम

चर्चा के दौरान चैटजीपीटी (ChatGPT) और जेमिनी (Gemini) जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के बढ़ते उपयोग पर भी विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. मनुश्री गुप्ता ने एआई के उपयोग को लेकर एक चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा कि ये टूल्स कई बार गलत और अटीक स्व-निदान (self-diagnoses) को बढ़ावा दे सकते हैं, जैसे कि एडीएचडी (ADHD) का खुद से अनुमान लगाना, या फिर उपयोगकर्ताओं को अपने पार्टनर्स को नार्सिसिस्टिक या टॉक्सिक करार देने के लिए प्रेरित करना। हालांकि, दूसरी ओर उन्होंने यह भी माना कि एआई लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने से जुड़ी शुरुआती झिझक और सामाजिक कलंक (stigma) को पार करने में मदद कर सकता है।

व्यावहारिक निहितार्थ और क्या सत्यापित है

  • पुष्टि किए गए तथ्य: हेल्थवेल्थ समिट में डॉ. समीर पारिख, डॉ. मनुश्री गुप्ता और डॉ. संदीप वोहरा की उपस्थिति और उनके द्वारा दिए गए बयान कि तीन-चौथाई लोग मदद नहीं लेते, इस रिपोर्ट का मुख्य आधार हैं।
  • अज्ञात और अनिश्चित पहलू: एआई टूल्स मानसिक स्वास्थ्य सुधार में दीर्घकालिक रूप से कितने प्रभावी हैं और क्या समाज में मदद मांगने का रुझान भविष्य में बदलेगा, इस पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
  • पाठक मूल स्रोत की जांच कैसे करें: पाठक इस विषय से जुड़ी मूल जानकारी और विवरण के लिए इंडिया टुडे (India Today) की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट देख सकते हैं, जिसका लिंक नीचे दिया गया है।

मूल आधिकारिक स्रोत की पुष्टि के लिए यहाँ देखें: [India Today - Wellness Video](https://www.indiatoday.in/lifestyle/wellness/video/does-social-media-help-people-seek-mental-health-support-3028093-2026-10-29)

मूल स्रोत पढ़ें: Does social media help people seek mental health support? - India Today - India Today

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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