अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान

इसरो ने लॉन्च किया एनवीएस-03 उपग्रह, 'नाविक' प्रणाली को मिली मजबूती

विज्ञापन
GlobeWire Daily पर विज्ञापन दें

· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.amarujala.com

2 मिनट में पढ़ें

मुख्य बातेंभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से एनवीएस-03 उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। यह प्रक्षेपण भारत के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम 'नाविक' (एनएवीआईसी) की अगली पीढ़ी के तहत किया गया है।
इसरो ने लॉन्च किया एनवीएस-03 उपग्रह, 'नाविक' प्रणाली को मिली मजबूती

चित्र: Amar Ujala · स्रोत चित्र के उपयोग अधिकार स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं · चित्र स्रोत · Cropped to 16:9 for the website

इसरो ने किया एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से एनवीएस-03 उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। यह प्रक्षेपण भारत के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम 'नाविक' (एनएवीआईसी) की अगली पीढ़ी के तहत किया गया है।

नाविक प्रणाली की तकनीकी स्थिति और विशेषताएं

रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम को सटीक स्थिति और समय बताने के लिए अंतरिक्ष में कम से कम चार सक्रिय उपग्रहों के लाइव सिग्नल की आवश्यकता होती है।

  • सक्रिय उपग्रहों की संख्या: एनवीएस-03 के जुड़ने से अंतरिक्ष में नाविक के सक्रिय उपग्रहों की संख्या चार हो गई है।
  • स्वदेशी परमाणु घड़ी: इस नए उपग्रह में भारत में निर्मित 'रुबिडियम परमाणु घड़ी' स्थापित की गई है, जो नैनोसेकंड स्तर की सटीकता के साथ समय की जानकारी देने में सक्षम है।

रणनीतिक महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रिपोर्ट में बताया गया है कि नाविक प्रणाली की परिकल्पना और शुरुआत 1999 के कारगिल संघर्ष के बाद की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की गई थी। उस दौरान विदेशी नेविगेशन डेटा तक सीमित पहुंच के अनुभवों के बाद इस स्वदेशी तकनीक को विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए थे।

  • आत्मनिर्भरता: इस प्रणाली के पूरी तरह कार्यात्मक होने से भारत को अपनी रक्षा और नागरिक जरूरतों के लिए विदेशी जीपीएस या ग्लोनास प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने का दावा किया गया है।
  • रक्षा उपयोग: रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध या संकट की स्थिति में यह प्रणाली सैन्य ऑपरेशनों, मिसाइल मार्गदर्शन और विमान संचालन के लिए स्वदेशी और सुरक्षित नेविगेशन डेटा प्रदान करने में उपयोगी साबित हो सकती है।

सत्यापन और आधिकारिक जानकारी

इस प्रक्षेपण और नाविक प्रणाली से जुड़ी तकनीकी विशिष्टताओं की पुष्टि इसरो की आधिकारिक विज्ञप्ति और अंतरिक्ष विभाग के माध्यम से की जा सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि विस्तृत और अद्यतन तकनीकी आंकड़ों के लिए इसरो के आधिकारिक पोर्टल का अवलोकन करें।

यह खबर शेयर करें
मूल स्रोत पढ़ें: भारतीय सेना को इसरो से मिली ताकत: युद्ध के समय पूरी ताकत से काम करेगा 'नाविक'; अमेरिकी असहयोग की क्या भूमिका?

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

लेखक के बारे में

GlobeWire Daily Editorial Desk — प्रकाशित स्रोतों पर आधारित AI-सहायता प्राप्त खबरें।

और पढ़ें