बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश: यौन उत्पीड़न पीड़ितों की सहायता के लिए मनोधैर्य और वात्सल्य योजना के एकीकरण पर विचार करें
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पीड़ितों के पुनर्वास हेतु अदालती आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के पुनर्वास और उन्हें सरकारी लाभ दिलाने के लिए राज्य की 'मनोधैर्य' योजना को केंद्र सरकार की 'वात्सल्य' योजना के साथ जोड़ने की संभावना पर विचार करे। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस अशिष चव्हाण की बेंच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यौन उत्पीड़न के बाद अस्पताल जाने वाली महिलाओं और लड़कियों को सरकारी सहायता और पुनर्वास योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।
प्रस्तावित एकीकरण के मुख्य उद्देश्य
- सहज पहुँच: अदालत का मुख्य लक्ष्य यह है कि पीड़िताओं को दोनों योजनाओं का लाभ एक ही मंच या स्तर पर मिल सके, ताकि प्रशासनिक जटिलताओं के कारण कोई भी सहायता से वंचित न रहे।
- व्यापक सहायता: अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वित्तीय मदद ही पर्याप्त नहीं है। पीड़िताओं के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, उनकी शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना एक अनिवार्य व्यवस्था होनी चाहिए।
- समन्वय का प्रयास: राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे को निर्देश दिया गया है कि वे महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ चर्चा करें और दोनों योजनाओं के समन्वय का विस्तृत विवरण अदालत के समक्ष पेश करें।
मनोधैर्य योजना क्या है?
महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित 'मनोधैर्य योजना' का उद्देश्य यौन उत्पीड़न और एसिड अटैक की पीड़िताओं को राहत प्रदान करना है। इसमें ₹10 लाख तक की सहायता का प्रावधान है। समय के साथ, इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें 'प्रिवेंशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिकिंग एक्ट' (PITA) की पीड़िताओं और घरेलू दुर्घटनाओं (जैसे रसोई गैस फटने) से झुलसी महिलाओं को भी शामिल किया गया है।
सत्यापन और आगे की कार्यवाही
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर के लिए निर्धारित की है। सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी या अदालती कार्यवाही के अपडेट के लिए, संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या बॉम्बे हाईकोर्ट के सार्वजनिक पोर्टल पर देखा जा सकता है।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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