जोहान्सबर्ग में अवैध स्वर्ण खनन और धंसती जमीन का संकट: एक गहरी चुनौती
· GlobeWire Daily Business Desk · Source: www.theguardian.com

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दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के पश्चिम में स्थित रूडेपोर्ट के पास अवैध स्वर्ण खनन यानी 'जामा जामा' (Zama Zamas) की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। सोने की बढ़ती कीमतों और व्यापक बेरोजगारी के कारण यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इसका असर न केवल पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है, बल्कि आम नागरिकों और पशु कल्याण संगठनों पर भी इसका सीधा प्रभाव देखा जा रहा है।
पानी का संकट और स्थानीय प्रभाव
रूडेपोर्ट के पास स्थित पशु कल्याण संगठन 'क्लॉ' (Claw) की संचालक कोरा बेली के अनुसार, हाल ही में दर्जनों अवैध खनिक उनके चैरिटी संस्थान के पास पहुंच गए। संगठन के पास घायल और बचाए गए जानवरों के लिए दो बड़े पानी के टैंक हैं, जिन्हें नगर निगम द्वारा अनियमित रूप से भरा जाता है। खनिकों द्वारा पानी का उपयोग किए जाने के कारण संगठन को अपने ही जानवरों के लिए पानी बचाने वास्ते कड़े कदम उठाने पड़े। स्थानीय निवासियों और संगठनों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई इस बड़े पैमाने पर फैली समस्या के मुकाबले नाकाफी साबित हो रही है।
पृष्ठभूमि और अवैध खनन के कारण
दक्षिण अफ्रीका का इतिहास खनन से गहराई से जुड़ा हुआ है। 1884 में सोने की खोज के बाद जोहान्सबर्ग शहर का विकास हुआ था। हालांकि, समय के साथ उत्पादन कम हुआ और कई खदानें बंद हो गईं। खनन कंपनियों पर यह कानूनी दायित्व होता है कि वे बंद खदानों को सील करें और पर्यावरण को पुनर्जीवित करें, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में हजारों लावारिस और असुरक्षित खदानें मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन के पीछे उच्च स्वर्ण मूल्य, गरीबी, बेरोजगारी, और राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसे कई गहरे कारक जिम्मेदार हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दक्षिण अफ्रीका के कुल स्वर्ण उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अवैध रूप से निर्यात किया जाता है, जिसमें दसियों हजार खनिक शामिल हैं।
सिंकहोल और राजनीतिक बहस
जोहान्सबर्ग के दक्षिण और पश्चिम में सड़कों और जमीन के धंसने (सिंकहोल) की घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थानीय राजनेताओं का दावा है कि इन सिंकहोल और सड़क धंसने के लिए पूरी तरह से अवैध खनिक जिम्मेदार हैं।
हालांकि, पर्यावरण और नृविज्ञान (Anthropology) के विशेषज्ञों की राय इससे भिन्न है। कोलंबिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रोसालिंड मॉरिस के अनुसार, जोहान्सबर्ग के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों की चट्टानें पानी निकाले जाने के कारण अस्थिर हो जाती हैं। उनका कहना है कि औपचारिक औद्योगिक खनन द्वारा बड़े पैमाने पर पानी निकालने के कारण होने वाली क्षति मुख्य कारणों में से एक है, हालांकि अवैध खनिकों की गतिविधियां भी कुछ हद तक संरचनात्मक पतन का कारण बनती हैं।
व्यावहारिक निहितार्थ और आगे की जानकारी
- पुष्टि किए गए तथ्य: दक्षिण अफ्रीका में बड़ी संख्या में लावारिस खदानें मौजूद हैं, सोने की ऊंची कीमतों के कारण अवैध खनन बढ़ रहा है, और जमीन धंसने व पानी की कमी जैसी समस्याएं स्थानीय स्तर पर गंभीर रूप ले रही हैं।
- अज्ञात पहलू: अवैध खनिकों और उनसे जुड़े आपराधिक सिंडिकेट्स का सटीक आंतरिक नेटवर्क तथा भूमिगत वास्तविक क्षति का पूरा पैमाना अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।
- सत्यापन: पाठक इस विषय से जुड़ी मूल और विस्तृत रिपोर्ट द गार्डियन (The Guardian) के आधिकारिक वेब पोर्टल पर देख सकते हैं: The Guardian Source।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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