युद्ध और संघर्ष

इजरायल के संसदीय चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं, अरब दलों का रिकॉर्ड मतदान

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· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.aljazeera.com

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मुख्य बातेंमंगलवार को संपन्न हुए इजरायल के संसदीय चुनावों में लगभग 90 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों प्रमुख राजनीतिक ब्लॉक 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के आंकड़े से पीछे रह गए हैं।
Israel’s election rhetoric: What candidates said, and how they performed

चित्र: Nils Adler · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation

इजरायल के संसदीय चुनाव का अवलोकन

मंगलवार को संपन्न हुए इजरायल के संसदीय चुनावों में लगभग 90 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों प्रमुख राजनीतिक ब्लॉक 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के आंकड़े से पीछे रह गए हैं।

प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार:

  • नेतन्याहू का ब्लॉक: 53 सीटें जीतने की स्थिति में है।
  • आइसेनकोट का विपक्षी ब्लॉक: 48 सीटें मिलने की उम्मीद है।
  • अरब बहुसंख्यक दल: इजरायली फिलिस्तीनी नागरिकों के लगभग 80 प्रतिशत के रिकॉर्ड मतदान के बल पर ऐतिहासिक 19 सीटें हासिल की हैं।

इस परिणाम ने अरब दलों को गठबंधन के समीकरण के केंद्र में ला दिया है, हालांकि कई प्रमुख नेताओं ने उनके साथ सरकार बनाने से इनकार किया है।

उम्मीदवारों के रुख और अभियान की बयानबाजी

चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने शासन, सुरक्षा और अल्पसंख्यक अधिकारों पर तीखी बयानबाजी की।

  • बेंजामिन नेतन्याहू (लिकुड): प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सुरक्षा के मुद्दों पर जोर दिया और अरब दलों पर निर्भर रहने वाली सरकार के खिलाफ चेतावनी दी। चुनाव के बाद, लिकुड ने अरब मतदाताओं पर आरोप लगाए, जिसे पुलिस और केंद्रीय चुनाव समिति ने खारिज कर दिया।
  • गादी आइसेनकोट (यशार पार्टी): आइसेनकोट ने वर्तमान सरकार को हटाने और नेतन्याहू के विकल्प के रूप में अपने ब्लॉक को पेश किया।
  • नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड (टुगेदर पार्टी): इन नेताओं ने नेतन्याहू की नीतियों की आलोचना की और कहा कि जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है।
  • इतामार बेन-गविर् और बेजालेल स्मोट्रिच: इन दक्षिणपंथी नेताओं ने कठोर सुरक्षा नीतियों और बस्तियों के विस्तार पर जोर दिया।
  • जॉइंट लिस्ट और राम: यूसुफ जबारीन और मंसूर अब्बास जैसे नेताओं ने यहूदी-अरब साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया और दक्षिणपंथी मतदाताओं को लुभाने के लिए डर पैदा करने वाले बयानों की आलोचना की।

चुनाव के बाद की अनिश्चितता

चूंकि किसी भी ब्लॉक को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए गठबंधन की राजनीति जटिल हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार गठन के लिए राजनीतिक दलों के बीच लंबी चर्चाओं और वार्ताओं की आवश्यकता होगी।

*नोट: आधिकारिक अंतिम परिणामों और सीटों की पुष्टि केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा की जाती है।*

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मूल स्रोत पढ़ें: Israel’s election rhetoric: What candidates said, and how they performed - Al Jazeera

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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