उपभोक्ता अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट घोटालों में बढ़ोतरी पर चेतावनी – 2026 में ₹800 करोड़ से अधिक का नुकसान

· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.bhaskar.com

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मुख्य बातेंइन आँकड़ों को उपभोक्ता‑अधिकार वकील एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता एन.एस. नप्पिनै द्वारा दायर जनहित याचिका के दौरान प्रस्तुत किया गया।
CJI बोले- बैंक डिजिटल अरेस्ट की जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते: अगर उनकी लापरवाही तो हर्जाना दें; 2026 में ₹800...

चित्र: Dainik Bhaskar · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation

सारांश

गुरुवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम की तेज़ी से बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। इस धोखाधड़ी में ठग पुलिस या अन्य अधिकारी का रूप धारण कर पीड़ितों से रिहाई के नाम पर पैसे की मांग करते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि जागरूकता अभियानों के बावजूद शिक्षित वर्ग भी इस जाल में फँस रहा है।

कोर्ट‑द्वारा प्रस्तुत आँकड़े

  • 2026: 22,000 से अधिक डिजिटल‑अरेस्ट केस दर्ज, कुल नुकसान ₹800 करोड़ से अधिक।
  • 2025: 58,239 केस और अनुमानित ₹1,211 करोड़ की चोरी।

इन आँकड़ों को उपभोक्ता‑अधिकार वकील एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता एन.एस. नप्पिनै द्वारा दायर जनहित याचिका के दौरान प्रस्तुत किया गया।

कोर्ट के मुख्य बिंदु

  1. पहले से रोकथाम जरूरी – घटना के बाद शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं; बैंकों को रीयल‑टाइम सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए।
  2. संदेहास्पद लेन‑देन पर अस्थायी रोक – बैंकों को शंकास्पद ट्रांजैक्शन को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने और स्थानीय पुलिस को सूचना देने का अधिकार देना चाहिए।
  3. मुआवजा प्रावधान – RBI को ऐसे नियम बनाने की सलाह दी गई है जिसमें वित्तीय संस्थान की लापरवाही से हुए नुकसान की भरपाई का प्रावधान हो।
  4. केवाईसी नियमों की समीक्षा – 2026 के लिए RBI को संशोधित केवाईसी निर्देश और सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया।

रिपोर्टेड पीड़ित अनुभव

वकील क्यूरी ने बताया कि हाल ही में एक महिला को वीडियो‑कॉल पर “पुलिस अधिकारी” बनकर 2.5 करोड़ रुपये की मांग की गई। डर के कारण महिला ने तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दिए, जो बाद में ठगों के खाते में जमा हुए। वकीलों ने कहा कि मनोवैज्ञानिक दबाव ही इस प्रकार के घोटालों में प्रमुख कारक है।

प्रस्तावित कानूनी कदम

  • अलग अपराध की मान्यता – सरकार को डिजिटल‑अरेस्ट को एक विशिष्ट आपराधिक धारा के रूप में स्थापित करने और कड़ी सजा का प्रावधान करने की सलाह दी गई।
  • संपत्ति जप्ति – न्यायाधीश सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना ने कहा कि ठोस सबूत मिलने पर आरोपी की संपत्ति फ्रीज की जा सकती है।
  • राज्य‑स्तर समन्वय – याचिकाकर्ताओं ने सभी साइबर‑क्राइम मामलों को एक ही मंच पर लाने की मांग की, क्योंकि अलग‑अलग राज्य जांच में बाधा उत्पन्न होती है।

त्योहारों में साइबर‑जोखिम

साइबर‑सुरक्षा कंपनी आर्कटिक वुल्फ ने बताया कि त्योहारी सीजन में ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल भुगतान और ट्रैवल बुकिंग में बढ़ोतरी के कारण घोटालों की संभावना बढ़ती है। आम तौर पर उपयोग किए जाने वाले तरीकों में शामिल हैं:

  • भारी डिस्काउंट या पार्सल‑डिलीवरी का झूठा संदेश।
  • नकली बैंक अलर्ट या केवाईसी अपडेट का अनुरोध।
  • एसएमएस, व्हाट्सएप या ई‑मेल के माध्यम से भेजे गए दुष्ट लिंक जो व्यक्तिगत डेटा या ओटीपी चुरा लेते हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा टिप्स

  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें; भेजने वाले का नंबर दोबारा जाँचें।
  • केवल आधिकारिक ऐप‑स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें।
  • किसी भी भुगतान या केवाईसी अनुरोध की पुष्टि सीधे बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से करें।
  • संदेहास्पद कॉल/मैसेज को तुरंत स्थानीय पुलिस और अपने बैंक को रिपोर्ट करें।

कोर्ट के बयान की पुष्टि कैसे करें?

  1. सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 28 जुलाई 2026 को जारी पूर्ण आदेश या निर्णय देखें।
  2. RBI की पोर्टल पर केवाईसी और उपभोक्ता मुआवजा से संबंधित ड्राफ्ट नियम देखें।
  3. राष्ट्रीय साइबर‑क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर नवीनतम केस संख्या और नुकसान के आँकड़े जाँचें।
  4. विश्वसनीय समाचार स्रोतों से रिपोर्ट पढ़ें, सोशल‑मीडिया पर बिना पुष्टि के फैलाए गए पोस्ट से बचें।

--- *यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कोर्ट की कार्यवाही और विभिन्न भारतीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों पर आधारित है। कोई नई जाँच‑पड़ताल नहीं की गई है।*

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मूल स्रोत पढ़ें: CJI बोले-मोबाइल को दीवार पर मारें और डिजिटल अरेस्ट खत्म: जागरूकता के बावजूद लोग क्यों फंस रहे; 2026 में ₹800 करोड़ से ज्यादा की ठगी 0:55 Play video

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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