चाबी इग्निशन में छोड़ने पर कार चोरी का क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने दिए 4.25 लाख रुपये देने के आदेश
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.amarujala.com

चित्र: Amar Ujala · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation
दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनियों के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक बीमा कंपनी को पीड़ित कार मालिक को 4.25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। बीमा कंपनी ने इस आधार पर कार चोरी का दावा खारिज कर दिया था कि पीड़ित ने कार की चाबी इग्निशन में छोड़ दी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति अपनी कार से घर लौट रहा था, तभी अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर उससे गाड़ी छीन ली। इस मामले में शुरुआत में ई-एफआईआर दर्ज की गई थी और बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिकी में अन्य धाराएं जोड़ी गईं। इसके बाद पीड़ित ने अपनी चोरी हुई कार के लिए बीमा दावा प्रस्तुत किया था।
बीमा कंपनी का रुख और इनकार
बीमा कंपनी ने 12 अक्टूबर 2020 को पत्र भेजकर पॉलिसी की शर्त संख्या 5 का हवाला दिया और क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि इग्निशन में चाबी छोड़ना घोर लापरवाही और सुरक्षा शर्तों का उल्लंघन है। आयोग के समक्ष कंपनी ने शिकायत को बेबुनियाद बताया और तर्क दिया कि वाहन को फाइनेंस करने वाले बैंक को भी कानूनी कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था।
उपभोक्ता आयोग का फैसला
आयोग ने बीमा कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी उल्लंघन के आधार पर बीमा कंपनी अपनी देनदारी से पूरी तरह नहीं बच सकती, जब तक कि उस उल्लंघन के कारण घटना होने का पुख्ता प्रमाण न हो। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि क्लेम न मिलने से पीड़ित को अत्यधिक मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी।
मुआवजे का विवरण
उपभोक्ता आयोग ने निम्नलिखित भुगतानों का आदेश दिया है:
- वाहन की आईडीवी राशि: गाड़ी की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू के रूप में 4,00,000 रुपये।
- मानसिक उत्पीड़न व खर्च: मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च के एवज में 25,00,000 के बजाय 25,000 रुपये।
- कुल देय राशि: बीमा कंपनी को कुल 4,25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
व्यावहारिक निहितार्थ और सत्यापन
- कानूनी उपाय: यदि किसी पॉलिसीधारक का क्लेम केवल तकनीकी आधारों पर खारिज किया जाता है, तो उपभोक्ता फोरम में चुनौती दी जा सकती है।
- दस्तावेजों का रखरखाव: पॉलिसी दस्तावेज, एफआईआर, रिजेक्शन लेटर और पत्राचार को सुरक्षित रखें।
- सत्यापन: मूल निर्णयों और घोषणाओं की पुष्टि आधिकारिक जिला उपभोक्ता आयोग के अभिलेखों के माध्यम से की जा सकती है।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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