अमेरिकी अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप का 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' के खिलाफ 10 अरब डॉलर का मानहानि मुकदमा खारिज किया
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: timesofindia.indiatimes.com

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अदालत का फैसला और मुख्य बिंदु
अमेरिका में एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) के खिलाफ दायर 10 अरब डॉलर का मानहानि का मुकदमा दूसरी बार खारिज कर दिया है। मियामी में तैनात अमेरिकी जिला न्यायाधीश डैरिन पी. गेल्स ने इस मामले को 'विथ प्रेज्यूडिस' (with prejudice) खारिज किया है, जिसका अर्थ है कि वादी अब इसी मामले को दोबारा उसी अदालत में दायर नहीं कर पाएगा।
न्यायाधीश गेल्स ने अपने फैसले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें कही हैं:
- एक्चुअल मैलिस (Actual Malice) की कमी: अदालत ने माना कि ट्रंप यह साबित करने में विफल रहे कि अखबार ने रिपोर्टिंग करते समय 'एक्चुअल मैलिस' यानी जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण इरादे से काम किया था।
- कानूनी मानक का अभाव: न्यायाधीश ने ट्रंप की दलीलों को 'कमजोर' बताते हुए कहा कि संशोधित शिकायत भी मानहानि के लिए आवश्यक कानूनी मानक को पूरा करने में विफल रही है।
- अखबार का पक्ष: अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि अखबार को ट्रंप के खंडन के बाद रिपोर्ट प्रकाशित नहीं करनी चाहिए थी। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अखबार ने अपने लेख में ट्रंप के खंडन को भी शामिल किया था, जिसमें उन्होंने पत्र को फर्जी बताया था।
विवाद का आधार क्या है?
यह कानूनी विवाद पिछले साल वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से शुरू हुआ था। इस रिपोर्ट में एक कथित पत्र और ड्राइंग का जिक्र था, जिस पर डोनाल्ड ट्रंप का नाम होने का दावा किया गया था। यह सामग्री 2003 में जेफरी एपस्टीन के 50वें जन्मदिन के लिए तैयार किए गए एक एल्बम से जुड़ी थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस पत्र को घिसलेन मैक्सवेल द्वारा एकत्र किया गया था। ट्रंप ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'झूठा और मानहानिकारक' बताया था।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की स्थिति
ट्रंप ने अपनी याचिका में 'डाउन जोन्स' (अखबार की मूल कंपनी) और रूपर्ट मर्डोक सहित अन्य प्रतिवादियों पर मानहानि का आरोप लगाया था। अदालत ने 1964 के 'न्यूयॉर्क टाइम्स बनाम सुलिवन' मामले का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक हस्तियों को यह साबित करना होगा कि प्रकाशन ने जानबूझकर गलत जानकारी दी थी।
- वर्तमान स्थिति: न्यायाधीश ने अप्रैल में पहली बार इस मुकदमे को खारिज किया था, लेकिन तब ट्रंप को संशोधित शिकायत दाखिल करने की अनुमति दी थी। मई में दाखिल की गई संशोधित शिकायत के बाद अब इसे स्थायी रूप से खारिज कर दिया गया है।
- अगले कदम: ट्रंप की कानूनी टीम के पास इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प हो सकता है, हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस मामले के बारे में अधिक जानकारी और विस्तृत अदालती आदेशों को देखने के लिए अमेरिकी अदालती रिकॉर्ड (PACER सिस्टम) का उपयोग किया जा सकता है।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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