तमिलनाडु शिक्षक शिक्षा विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव-प्रभारी की नियुक्ति, अनियमितता के आरोपों के बाद हुई कार्रवाई
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चेन्नई में स्थित तमिलनाडु शिक्षक शिक्षा विश्वविद्यालय (TNTEU) में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। विश्वविद्यालय के शैक्षिक प्रौद्योगिकी विभाग की डीन एम. कनमणि को नया कुलसचिव-प्रभारी (Registrar-in-charge) नियुक्त किया गया है। यह कदम भ्रष्टाचार विरोधी संगठन 'अप्पर इयक्कम' (Arappor Iyakkam) द्वारा पूर्व कुलसचिव पर लगाए गए अनियमितता के गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।
नियुक्ति और प्रशासनिक बदलाव
विश्वविद्यालय द्वारा 26 अक्टूबर को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रो. एम. कनमणि की यह नियुक्ति डॉ. के. राजशेखरन को 26 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव-प्रभारी के पद से कार्यमुक्त किए जाने के परिणामस्वरूप की गई है। इस बदलाव से प्रशासनिक स्तर पर विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
अनियमितता के आरोप और पृष्ठभूमि
इससे पहले, 'अप्पर इयक्कम' संगठन ने शैक्षणिक वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान संबद्धता निरीक्षण प्रक्रिया (affiliation inspection process) में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। संगठन ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त करने के बाद यह खुलासा किया था कि कई कॉलेजों में एक ही दिन में भौतिक निरीक्षण किए गए, जबकि वे एक-दूसरे से कई किलोमीटर की दूरी पर स्थित थे। इसके अलावा, कुछ व्यक्तियों को एक ही समय में कई कॉलेजों का प्राचार्य (principal) दिखाए जाने का मामला भी सामने आया था।
भ्रष्टाचार विरोधी संगठन की मांगें
इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए 'अप्पर इयक्कम' के एम. राधाकृष्णन ने एक बयान जारी कर शिकायत की गहन और पारदर्शी जांच तथा इस कथित धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने विश्वविद्यालय के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें भी रखी हैं:
- संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के विवरण और तस्वीरों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए ताकि अनियमित कक्षाओं पर रोक लग सके।
- अन्ना विश्वविद्यालय की तर्ज पर संकाय सदस्यों के लिए मासिक ऑनलाइन आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की जाए।
- सिंडिकेट द्वारा पारित प्रस्तावों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए।
पाठकों के लिए व्यावहारिक निहितार्थ और सत्यापन
यह घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता और निरीक्षण प्रक्रियाओं की सटीकता पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। पाठकों और छात्रों के लिए यह जानना आवश्यक है कि इस मामले में क्या तथ्यात्मक रूप से पुष्ट है और क्या अभी अनिश्चित है।
- पुष्ट तथ्य: उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रो. एम. कनमणि की नए कुलसचिव-प्रभारी के रूप में नियुक्ति, पूर्व कुलसचिव को पद से हटाना, और 'अप्पर इयक्कम' द्वारा RTI के माध्यम से निरीक्षण प्रक्रिया में विसंगतियों के आरोप लगाना।
- अनसुलझे या अनिश्चित पहलू: आरोपों की विस्तृत न्यायिक जांच का परिणाम और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संगठन की अन्य मांगों पर भविष्य में उठाए जाने वाले कदम।
पाठक मूल आधिकारिक घोषणा और इस खबर से जुड़े विस्तृत विवरण को सत्यापित करने के लिए 'द हिंदू' की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं: The Hindu Report।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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