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पाकिस्तान: मानवाधिकार वकीलों को क्रिकेट सुरक्षा मामले में 10 साल की सजा

· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.bbc.com

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मुख्य बातेंअदालत ने आतंकवाद-रोधी अधिनियम के तहत उन्हें 10 साल की सजा सुनाई है, साथ ही सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने के लिए अतिरिक्त सजा भी दी गई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और प्रत्येक पर 2 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मजारी और चट्टा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
Pakistani Human Rights Lawyers Sentenced in Security Convoy Case

चित्र: www.bbc.com · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation

इस्लामाबाद में अदालत का फैसला

पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने मानवाधिकार वकील इमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्टा को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। यह मामला 25 अक्टूबर 2024 को इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे के दौरान हुई एक घटना से संबंधित है।

घटना का विवरण

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस जोड़े ने:

  • इस्लामाबाद के ज़ीरो पॉइंट पर इंग्लैंड टीम के सुरक्षा काफिले के लिए लगे बैरिकेड्स हटा दिए।
  • सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों के काम में बाधा डाली।

अदालत ने आतंकवाद-रोधी अधिनियम के तहत उन्हें 10 साल की सजा सुनाई है, साथ ही सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने के लिए अतिरिक्त सजा भी दी गई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और प्रत्येक पर 2 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया गया है। मजारी और चट्टा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

कानूनी पृष्ठभूमि

यह जोड़ा पिछले कई महीनों से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद है। इससे पहले उन पर सेना की आलोचना करने के लिए भी मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन सजाओं को निलंबित कर दिया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस मुकदमे की निंदा करते हुए कहा है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला और मामले की सुनवाई जेल के भीतर ही की गई, जो चिंताजनक है।

प्रतिक्रिया

मजारी और चट्टा ने खुद को 'अंतरात्मा का कैदी' बताया है और कहा है कि उन्हें उनके मानवाधिकार कार्यों के कारण निशाना बनाया जा रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की यास्मीन अहमद ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान की न्याय प्रणाली पर एक सवालिया निशान है। वर्तमान में, इस मामले और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर अंतरराष्ट्रीय निकायों की नजर बनी हुई है।

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मूल स्रोत पढ़ें: Human rights lawyer couple sentenced to 10 years' prison in Pakistan - BBC

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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