साइबर ठगी के बदलते ट्रेंड: डिजिटल अरेस्ट से लेकर एआई वॉयस क्लोनिंग तक
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.inextlive.com

चित्र: inextlive · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation
पटना से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, साइबर ठग डर, जरूरत और भरोसे को हथियार बनाकर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी नौकरी, मैलिशियस लिंक और एआई आवाज की नकल जैसे नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
सामने आए ठगी के तरीके
हालिया मामलों के अनुसार, ठगी की शुरुआत अक्सर अचानक आने वाले फोन कॉल या मैसेज से होती है। पटना की एक मल्टीनेशनल कंपनी के मैनेजर को जब परिचितों ने बताया कि उनके व्हाट्सएप नंबर से पैसे मांगे जा रहे हैं, तो उन्होंने फोन फॉर्मेट कर साइबर क्राइम ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई।
ठग मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक दबाव का उपयोग करते हैं:
- डिजिटल अरेस्ट: ठग खुद को जांच एजेंसियों या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराते हैं और गिरफ्तारी की धमकी देकर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं।
- फर्जी नौकरी और लोन: विदेश में नौकरी दिलाने, मुद्रा लोन या हैंडराइटिंग जांच जैसी नौकरियों के नाम पर प्रोसेसिंग फीस और एडवांस पैसे वसूले जाते हैं।
- संदिग्ध लिंक और क्यूआर कोड: बैंक खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट या क्रेडिट कार्ड के नाम पर लिंक भेजे जाते हैं। वहीं, पैसे भेजने या पाने के नाम पर क्यूआर कोड भेजकर यूपीआई पिन डलवाए जाते हैं।
- एआई आवाज की नकल: परिजनों के किसी दुर्घटना में फंसने का झांसा देने के पुराने तरीकों के साथ अब एआई की मदद से परिचित की आवाज जैसी आवाज बनाकर तत्काल पैसे मांगने के खतरे भी सामने आ रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़े और कार्रवाई
बिहार में साइबर अपराध से जुड़े आंकड़ों के अनुसार:
- जनवरी 2023 से जुलाई 2026 के बीच राज्य में 3,35,807 शिकायतें सामने आईं, जिनमें 1,490 करोड़ रुपये की ठगी का अनुमान है। इसमें से 299 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए।
- जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 59,579 शिकायतें दर्ज हुईं और ठगी की रकम 199.09 करोड़ रुपये रही। इस दौरान 51.84 करोड़ रुपये होल्ड किए गए और 7.06 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिले।
- अधिकारियों के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच ठगी की रकम ट्रांसफर करने वाले 1,216 म्यूल खातों की पहचान की गई।
तीन बड़ी चूक जिनसे बचना जरूरी
रिपोर्टों में तीन मुख्य वजहों का जिक्र किया गया है जो ठगी का शिकार बनाती हैं:
- बिना जांच किए किसी भी बैंक, केवाईसी या इनाम वाले लिंक को खोलना।
- क्यूआर कोड या भुगतान अनुरोध को समझे बिना यूपीआई पिन दर्ज करना।
- डरकर चुप रहना और परिवार या पुलिस को बताए बिना ठगों के निर्देश मानते रहना।
व्यावहारिक उपाय और सत्यापन
नागरिकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी संदिग्ध फोन कॉल, धमकी या वित्तीय अनुरोध पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। किसी भी सूचना की सत्यता जांचने के लिए आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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