साइबर सुरक्षा

एआई के दौर में उच्च शिक्षण संस्थानों की साइबर सुरक्षा पर मंडराता खतरा, रिपोर्ट में खुलासा

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· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.thehindu.com

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मुख्य बातेंहाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा क्षेत्र दुनिया भर में सबसे अधिक साइबर हमलों का सामना करने वाला क्षेत्र बन गया है। चेक प्वाइंट (Check Point) की शोध रिपोर्ट बताती है कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच वैश्विक स्तर पर प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को औसतन प्रति सप्ताह 4,696 साइबर हमलों का सामना करना पड़ा, जो कि अन्य उद्योगों के औसत से दोगुना…
एआई के दौर में उच्च शिक्षण संस्थानों की साइबर सुरक्षा पर मंडराता खतरा, रिपोर्ट में खुलासा

चित्र: www.thehindu.com · चित्र स्रोत · स्रोत चित्र 16:9 अनुपात में काटा गया

हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा क्षेत्र दुनिया भर में सबसे अधिक साइबर हमलों का सामना करने वाला क्षेत्र बन गया है। चेक प्वाइंट (Check Point) की शोध रिपोर्ट बताती है कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच वैश्विक स्तर पर प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को औसतन प्रति सप्ताह 4,696 साइबर हमलों का सामना करना पड़ा, जो कि अन्य उद्योगों के औसत से दोगुना है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में यह आंकड़ा और भी अधिक, यानी 7,452 हमले प्रति सप्ताह दर्ज किया गया।

क्यों आसान शिकार बन रहे हैं विश्वविद्यालय?

विश्वविद्यालयों का बुनियादी ढांचा स्वभाव से खुला होता है, जहां हजारों की संख्या में छात्र स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे व्यक्तिगत उपकरणों का उपयोग करते हैं। हर साल परिसरों में नए छात्र प्रवेश लेते हैं और संस्थान उनके आधार नंबर, बैंक विवरण, डिग्री प्रमाण पत्र और संपर्क जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियां एकत्र करते हैं। इसके अलावा, कई विश्वविद्यालयों में आईटी विभाग कम कर्मचारियों वाले और विकेंद्रीकृत होते हैं।

प्रवेश और परीक्षाओं के समय पूर्व-निर्धारित कैलेंडर के अनुसार गतिविधियां चलती हैं, जिससे हमलावरों को यह पता होता है कि परिसर कब अत्यधिक दबाव में काम कर रहा है।

एआई और पारंपरिक कमजोरियों का मेल

रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने कोई पूरी तरह नई तकनीक का आविष्कार नहीं किया है, बल्कि उसने पुरानी और पारंपरिक कमजोरियों का फायदा उठाना बेहद आसान कर दिया है। खुले हुए पासवर्ड, एपीआई, सादे पाठ (plain text) में संग्रहीत कुंजियां, और बिना मल्टी-फक्टर ऑथेंटिकेशन वाले एडमिनिस्ट्रेटर पैनल जैसे पारंपरिक अंतराल आज भी मौजूद हैं।

एआई के उपयोग से हमलावर सेकंडों में किसी को भी धोखा देने वाले फ़िशिंग ईमेल तैयार कर सकते हैं, छात्रों से तत्काल भुगतान कराने के लिए किसी कुलपति की आवाज़ की नकल कर सकते हैं, और बिना जांचे ऑनलाइन डाले गए ऐप्स में मैलवेयर कोड उत्पन्न कर सकते हैं।

प्रमुख तकनीकी घटनाएं और मामले

  • पीएचपी कमजोरियां (PHP2Shell): 21 अक्टूबर 2026 को, वर्डप्रेस और मूडल एलएमएस (Moodle LMS) जैसे पोर्टल्स के पीछे काम करने वाली पीएचपी भाषा में दो गंभीर खामियां ठीक की गईं, जो बिना पासवर्ड के वेब सर्वर पर नियंत्रण पाने की अनुमति दे सकती थीं।
  • डिजिटल प्रमाणपत्र चिंताएं: बेंगलुरु स्थित डिजिटल प्रमाण पत्र प्राधिकारी 'ई-मुद्रा' की निजी कुंजियों से जुड़ी कमजोरियां भी सामने आईं, जिन्हें सरल अंकों के रूप में पाया गया।
  • सरकारी और संस्थागत उदाहरण: मई 2026 में, CANVAS नामक LMS प्लेटफॉर्म पर हुए एक उल्लंघन में 275 मिलियन से अधिक छात्रों का डेटा प्रभावित हुआ था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में दिल्ली विश्वविद्यालय को लेकर एक रैनसमवेयर समूह के दावे की खबर आई थी, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम और जवाबदेही

अधिनियम के तहत, शैक्षणिक संस्थान अपने छात्रों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह हैं। अधिकांश सॉफ्टवेयर जैसे प्रवेश, ईआरपी, परीक्षा और एलएमएस सिस्टम आउटसोर्स या बाहर से खरीदे जाते हैं, लेकिन यदि विक्रेता (vendor) को कोई समस्या आती है, तो वह संस्था की ही समस्या बन जाती है।

व्यावहारिक निहितार्थ और क्या सत्यापित किया जा सकता है

पाठक और संस्थान इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियों की सत्यता के लिए मूल स्रोत की जांच कर सकते हैं।

  • पुष्टि की गई बातें: चेक प्वाइंट के आंकड़े, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हमलों की संख्या, और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के तहत संस्थानों की कानूनी देयता।
  • अज्ञात या अप्रमाणित बिंदु: दिल्ली विश्वविद्यालय पर हुए कथित रैनसमवेयर दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
  • सुझाव और समाधान: परिसरों में कागजी नीतियों के बजाय कड़े ऑडिट, छात्र 'रेड टीमों' (Red Teams) का गठन, और विक्रेताओं के साथ अनुबंध में सुरक्षा नियमों को शामिल करने की सलाह दी गई है।

इस विषय पर अधिक जानकारी और मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए पाठक द हिंदू के आधिकारिक स्रोत पर जा सकते हैं।

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मूल स्रोत पढ़ें: Cybersecurity in universities: How campuses are easy prey for AI-powered attacks - The Hindu

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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