आईआईएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों को अपनी रक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.theguardian.com

चित्र: the Guardian · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खाड़ी देशों को अपनी खरबों डॉलर की रक्षा व्यवस्थाओं में बदलाव करने की आवश्यकता है। यह रिपोर्ट हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद आई है, जिसने क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमियों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर पड़े आर्थिक प्रभावों को उजागर किया है।
क्षेत्रीय हमलों का दायरा
रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अप्रैल के युद्धविराम से पहले के हफ्तों में, मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र के 12 देशों को बड़ी संख्या में हमलों का सामना करना पड़ा। इनमें शामिल थे:
- 4,670 ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन
- 1,400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें
इनमें से लगभग आधे हमले संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाकर किए गए थे। हालांकि अधिकांश हमलों को रोक लिया गया, लेकिन ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, और एक अनुमान के मुताबिक नुकसान 58 अरब डॉलर (£43 अरब) तक पहुंच गया।
रक्षा रणनीतियों में कमियां
IISS के अध्ययन में संघर्ष के दौरान सामने आईं कई संरचनात्मक चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका से खरीदे गए महंगे हथियारों में भारी निवेश के बावजूद संकट के समय सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिल पाई। मुख्य निष्कर्षों में शामिल हैं:
- अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोनों और मिसाइलों को रोकने के लिए महंगे और उच्च-स्तरीय रक्षा प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता, जिससे लागत का असंतुलन पैदा हुआ।
- खाड़ी देशों के बीच क्षेत्रीय रक्षा एकीकरण की कमी।
- खदान हटाने की क्षमताओं (minesweeping) में कमी और सीमित जवाबी विकल्प।
- वायु युद्ध की नई चुनौतियों के लिए सैन्य तैयारियों की अपर्याप्तता।
अमेरिकी उपस्थिति और रणनीतिक दृष्टिकोण
रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों और सुरक्षा साझेदारियों को लेकर बदलती धारणाओं पर भी चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है कि क्षेत्र में जनमत इन साझेदारियों को एक विश्वसनीय सुरक्षा उपाय की बजाय एक रणनीतिक दायित्व के रूप में देखने लगा है। इसके अलावा, अमेरिकी सांसदों ने भी क्षतिग्रस्त सैन्य अड्डों के पुनर्निर्माण की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने सार्वजनिक रूप से ऐसे बड़े सैन्य ठिकानों को बनाए रखने की लागत-प्रभावशीलता पर सवाल उठाया जो मिसाइल हमलों के प्रति संवेदनशील हैं।
आधिकारिक बयानों की सत्यता की जांच कैसे करें
जो पाठक इस विषय पर अधिक जानकारी चाहते हैं, वे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) की आधिकारिक वेबसाइट या अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति की बैठकों के विवरण की समीक्षा कर सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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