एलएंडटी और बीएई सिस्टम्स ने भारतीय सेना के लिए बीवीएस10 ‘सिंधु’ एएटीवी का उत्पादन शुरू किया
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.janes.com

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उत्पादन का शुभारंभ
28 अक्टूबर 2026 को लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और बीएई सिस्टम्स ने गुजरात के हज़ीरा में स्थित एलएंडटी के आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में एक समारोह आयोजित किया, जिसमें भारतीय सेना के लिए बीवीएस10 ‘सिंधु’ आर्टिकुलेटेड ऑल‑टेरेन व्हीकल (AATV) के निर्माण की औपचारिक शुरुआत का संकेत दिया गया।
पहला बैच और डिलीवरी शेड्यूल
- प्रारंभिक ऑर्डर: 18 वाहन, जो भारतीय सेना ने नवंबर 2025 में दिया था।
- डिलीवरी समय: पहली डिलीवरी मार्च 2027 से शुरू होने की योजना है।
- निर्माण: एलएंडटी लाइसेंस के तहत वाहन बनाता है, जबकि तकनीकी और डिजाइन समर्थन बीएई सिस्टम्स हैग्लुंड्स, मूल बीवीएस10 निर्माता, से मिलता है।
उपयोग का इरादा
सेना इन सिंधु एएटीवी को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के साथ उत्तर और पश्चिमी सीमाओं पर तैनात करने की योजना बना रही है। ये वाहन 18,000 फ़ुट (लगभग 5,500 मी) की ऊँचाई तक के उच्च‑भूभाग में संचालन के लिए प्रमाणित हैं, जिससे कठिन पहाड़ी इलाकों में तेज़ गति से चलना संभव हो सकेगा।
वैरिएंट विवरण – अभी तक नहीं बताया गया
प्रारंभिक ऑर्डर में शामिल वैरिएंटों का सटीक मिश्रण सार्वजनिक नहीं किया गया है। बीवीएस10 परिवार में विभिन्न कॉन्फ़िगरेशन उपलब्ध हैं, जैसे:
- सैनिक परिवहन
- कमांड‑एंड‑कंट्रोल
- एम्बुलेंस एवं मेडिकल इवैक्यूएशन
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई
- मरम्मत, रिकवरी और फायर‑सपोर्ट
आधिकारिक टिप्पणी
एलएंडटी के सीनियर वाइस‑प्रेसिडेंट और प्रिसिजन इंजीनियरिंग हेड अरुण रामचंदानी ने पत्रकारों से कहा:
“मैं आश्वस्त हूँ कि यह वाहन इस प्रारंभिक अनुबंध के बाद बड़ी संख्या में इंडक्ट किया जाएगा।” “भारतीय सेना ने संकेत दिया है कि यह वाहन विभिन्न भूमिकाओं और मात्रा में इंडक्ट किया जा सकता है। सेना ने सटीक संख्याएँ नहीं बताई हैं, परन्तु हम देखते हैं कि जैसे-जैसे यह वाहन इंडक्ट होगा, भविष्य में इसकी संख्या काफी बढ़ेगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि एलएंडटी के आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स को स्वचालित प्रक्रियाओं से सुसज्जित किया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो सकेगा।
व्यावहारिक प्रभाव
- मोबिलिटी में सुधार: सिंधु एएटीवी उच्च‑ऊँचाई वाले कठिन भूभाग में तेज़ी से चलने की क्षमता देता है, जिससे लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) और पश्चिमी सीमा पर त्वरित प्रतिक्रिया में मदद मिल सकती है।
- देशी क्षमता निर्माण: लाइसेंस‑आधारित उत्पादन से भारत को तकनीकी हस्तांतरण के साथ घरेलू विशेषज्ञता विकसित करने का अवसर मिलता है, जबकि बीएई सिस्टम्स से आवश्यक तकनीकी समर्थन मिलता रहता है।
- सत्यापन: उत्पादन की प्रगति को एलएंडटी और बीएई सिस्टम्स के आधिकारिक प्रेस रिलीज़, तथा रक्षा मंत्रालय के भविष्य के खरीद अपडेट के माध्यम से जांचा जा सकता है।
भविष्य की राह
पहले 18 वाहनों का उत्पादन एक शुरुआती कदम है, लेकिन दोनों कंपनियों ने बताया है कि यह कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, जिससे सेना विभिन्न भूमिकाओं में सिंधु को बड़े पैमाने पर तैनात कर सकेगी।
--- *सभी बयानों को कंपनियों और भारतीय सेना के बयान के रूप में उल्लेख किया गया है; भविष्य में खरीद मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।*
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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