तमिलनाडू उच्च शिक्षा विभाग ने अध्यक्षों को रोजगार तैयारी करने को कहा
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तमिलनाडू उच्च शिक्षा विभाग ने अध्यक्षों को रोजगार तैयारी करने को कहा
तमिलनाडू उच्च शिक्षा विभाग ने उच्च शिक्षा संस्थानों के अध्यक्षों (HoDs) को छात्रों के रोजगार तैयारी की प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। यह निर्णय शुक्रवार को कॉलेजिएट एजुकेशन कमीशनर, तकनीकी शिक्षा निदेशक और सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को एक पत्र के माध्यम से भेजा गया। विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस प्रक्रिया अपनाई है कि छात्र उद्योग के अनुकूल हो जाएं।
विभाग के आदेश और उसकी प्रक्रिया:
- अध्यक्षों को लगभग 3 से 5 निजी व्यवसायिक घरानों से जोड़कर औपचारिक संगठन (MoU) के माध्यम से साझेदारी स्थापित करने को कहा गया है।
- इससे छात्रों को पाठ्यक्रम की नियमित बातचीत, उद्योग से संबंधित कार्य और छोटे परियोजनाओं से उद्योग अभ्यास से परिचित कराया जा सके।
- विज्ञान और वाणिज्य जैसे बुनियादी विषयों सहित सभी विभागों को इस कार्य में शामिल किया गया है।
- विभाग ने आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के पाठ्यक्रम से संबंधित 173 कौशलों की सूची तैयार की है।
- उदाहरण के लिए, भाषाविज्ञान और सामाजिक विज्ञान (इतिहास, राजनीति विज्ञान) जैसे विषयों में डिजिटल मार्केटिंग जैसे सामान्य कौशल अपनाए जा सकते हैं।
- अध्यक्षों को 2 से 3 कौशल विकास दिशाओं (verticals) की पहचान करनी है, प्रत्येक में 6 कौशल होंगे।
- संस्थानों को तमिलनाडू राज्य उच्च शिक्षा परिषद (TANSCHE) से ट्रेनिंग और सहायता लेने को कहा गया है।
- प्रत्येक संस्थान से TANSCHE को 5 प्लेसमेंट कोआपरेटरों की सूची 16 नवंबर तक जमा करने को कहा गया है।
विरोध और विश्लेषण:
- शिक्षा कार्यकर्ताओं ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया है।
- राज्य समावेशी पाठ्यक्रम प्रणाली (SPCSS-TN) ने कहा कि अध्यक्ष विषय विशेषज्ञ हैं और उन्हें रोजगार तैयारी अधिकारियों के पद पर नहीं रखा जा सकता।
- SPCSS-TN के सचिव पी.बी. प्रिंस गजेंद्रबाबू ने पूछा कि क्या एक प्रोफेसर या विभागाध्यक्ष कॉलेज या विश्वविद्यालय में रोजगार तैयारी अधिकारी के काम कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि प्रोफेसरों और विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी शोध, शैक्षणिक प्रक्रियाओं (पाठ्यक्रम डिजाइन से मूल्यांकन तक) की देखरेख और शैक्षणिक कार्यों से संबंधित प्रशासनिक कार्य हैं।
- तमिलनाडू सरकारी कॉलेज शिक्षक संघ (TNGCTA) के सचिव एस. सुधेश ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में 7,000 से अधिक रिक्त पद हैं और कुछ विभागों में पूर्ण शिक्षक नहीं हैं, इसलिए सरकार को स्थाई शिक्षक भर्ती पर ध्यान देना चाहिए।
व्यावहारिक निहितार्थ और सत्यापन:
- छात्रों के लिए यह आदेश रोजगार बाजार में उनकी तैयारी के लिए एक नई दिशा दे सकता है, लेकिन विश्वविद्यालयों के लिए इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा।
- इस आदेश की मूल घोषणा 'द हिंदू' अखबार में प्रकाशित है। पाठक इसकी मूल वेबसाइट https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/ से जांच कर सकते हैं। साथ ही, संबंधित विभागों (कॉलेजिएट एजुकेशन कमीशनर, TANSCHE) के आधिकारिक बयानों की भी जांच की जा सकती है।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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