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निकोलस स्टर्न की जलवायु अर्थशास्त्र रिपोर्ट के दो दशक: क्या पूंजीवाद अब भी वास्तविकता से दूर है?

· GlobeWire Daily Climate Desk · Source: www.theguardian.com

निकोलस स्टर्न की जलवायु अर्थशास्त्र रिपोर्ट के दो दशक: क्या पूंजीवाद अब भी वास्तविकता से दूर है?

चित्र: www.theguardian.com — Creative Commons

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मुख्य बातेंपारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच के संबंध को रेखांकित करने वाली ऐतिहासिक 'स्टर्न रिव्यू' (The Economics of Climate Change) के प्रकाशन को दो दशक पूरे हो चुके हैं। विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री निकोलस स्टर्न द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट ने अपने समय में पारंपर

पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच के संबंध को रेखांकित करने वाली ऐतिहासिक 'स्टर्न रिव्यू' (The Economics of Climate Change) के प्रकाशन को दो दशक पूरे हो चुके हैं। विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री निकोलस स्टर्न द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट ने अपने समय में पारंपरिक अर्थशास्त्र की उस सोच को चुनौती दी थी, जिसके तहत जलवायु संकट को अर्थव्यवस्था के लिए एक मामूली झटका माना जाता था।

स्टर्न रिव्यू के मुख्य निष्कर्ष और पारंपरिक अर्थशास्त्र

700 पृष्ठों वाली इस रिपोर्ट में डेटा और तर्कों के आधार पर मुख्य रूप से तीन निष्कर्ष निकाले गए थे:

  • जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई न करने की लागत, कार्रवाई करने की लागत से कहीं अधिक है।
  • जलवायु संकट एक 'बाजार विफलता' (market failure) है।
  • आर्थिक विकास और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी एक साथ संभव है।

रिपोर्ट का सबसे क्रांतिकारी बिंदु भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा था। पारंपरिक अर्थशास्त्र भविष्य की घटनाओं और नुकसान पर एक 'डिस्काउंट रेट' लागू करता है, जिसके कारण भविष्य के जीवन और संपत्तियों के मूल्य को वर्तमान की तुलना में कम आंका जाता है। स्टर्न ने इस अवधारणा को बदलते हुए यह स्थापित किया कि जलवायु सुरक्षा पर वर्तमान में किया जाने वाला निवेश भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।

अनिश्चितताएं और पारंपरिक मॉडल का प्रभाव

रिपोर्ट के प्रकाशन के समय पारंपरिक अर्थशास्त्रियों, जैसे येल विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर विलियम नॉर्डhaus, की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। नॉर्डhaus ने अपनी मॉडलों में मध्यम वैश्विक तापमान वृद्धि (3C से 4C) को आर्थिक रूप से स्वीकार्य बताया था, क्योंकि उनके अनुसार उत्सर्जन रोकने की लागत इस क्षति से अधिक थी। हालांकि जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि इस स्तर की वृद्धि से व्यापक स्तर पर खाद्य संकट और तटीय क्षेत्रों को भारी क्षति पहुंच सकती है।

आश्चर्यजनक रूप से, आज भी कई विश्वविद्यालयों में पारंपरिक विकास मॉडल पढ़ाए जाते हैं और सरकारें तथा वित्तीय संस्थान जलवायु संकट के प्रभाव को कम करके आंकने वाले अनुमानों का उपयोग करते हैं।

व्यावहारिक निहितार्थ और पाठक कैसे जांच करें

  • पुष्टि किए गए तथ्य: निकोलस स्टर्न की रिपोर्ट ने यह साबित किया कि कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक आर्थिक हित में है। स्टर्न के अनुसार, यदि वे आज यह रिपोर्ट दोबारा तैयार करें, तो वे जैव विविधता के पतन और प्रकृति के ह्रास को राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े खतरे के रूप में शामिल करेंगे।
  • अज्ञात पहलू: पारंपरिक वित्तीय बाजार अभी भी जलवायु जोखिमों का सही आकलन करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं, और कई बीमा कंपनियां तथा संस्थान जोखिम के आंकड़ों में सुधार करने के बजाय इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
  • सत्यापन: पाठक इस विषय से जुड़ी मूल टिप्पणी और विस्तृत विश्लेषण 'द गार्डियन' के आधिकारिक पोर्टल पर प्रकाशित फियोना हार्वे के आलेख में देख सकते हैं। मूल स्रोत लिंक: [The Guardian](https://www.theguardian.com/commentisfree/2026/oct/28/nicholas-stern-report-climate-consensus-lessons-capitalism)
मूल स्रोत पढ़ें: The climate crisis will destroy our economies – we learned this 20 years ago. When will we act? | Fiona Harvey

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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