विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच सरकार का मंथन: LTCG और STT दरों में बदलाव पर विचार
· GlobeWire Daily Public Services Desk · Source: navbharattimes.indiatimes.com

चित्र: navbharattimes.indiatimes.com — Creative Commons
विदेशी बिकवाली और बाजार का दबाव
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली के चलते बाजार के रुझानों को सुधारने के लिए सरकारी स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। हालिया गिरावट और विदेशी निवेश में कमी को देखते हुए, निवेशकों, मार्केट एनालिस्ट और टैक्स जानकारों से LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स) और STT (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स) में बदलाव के संबंध में सुझाव मांगे गए हैं।
वित्त मंत्री के संकेत और संभावित प्रस्ताव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान इन करों से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा था कि इस विषय पर काफी बहस चल रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि बजट की तैयारियों के इस चरण में यह बताना अभी सही नहीं होगा कि किन विशिष्ट प्रस्तावों पर अंतिम विचार किया जाएगा।
विचाराधीन प्रस्तावों में घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों के लिए कर नियमों को सहज बनाना शामिल है। इसके अलावा, एक ऐसी योजना पर भी विचार किया जा रहा है जिसके तहत विदेशी निवेशकों को टैक्स कैलकुलेशन के लिए कैपिटल गेन्स को भारतीय रुपये के बजाय डॉलर में कैलकुलेट करने की छूट दी जा सके।
वर्तमान कर ढांचा और बदलाव की वजहें
मौजूदा समय में लिस्टेड शेयरों पर LTCG टैक्स 12.5 फीसदी है, जो कुछ शर्तों के साथ 1.25 लाख रुपये से अधिक के सालाना मुनाफे पर लागू होता है और इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता है। पिछले दो वर्षों में बाजार का रिटर्न कमजोर रहा है और कॉर्पोरेट प्रॉफिट घटने से वेतन वृद्धि में भी सुस्ती आई है। इसके विपरीत, बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी काफी बढ़ी है।
ऐतिहासिक रूप से, सरकार ने 2018 में लिस्टेड शेयरों पर LTCG टैक्स को दोबारा लागू किया था और बाद के वर्षों में दरों तथा नियमों में संशोधन किए गए। केंद्रीय बजट 2024-25 में शेयरों पर LTCG टैक्स की दर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया था, जबकि सालाना छूट की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये किया गया था।
व्यावहारिक निहितार्थ, तुलना और अनिश्चितताएं
पुष्टि किए गए तथ्य बनाम अज्ञात:
- पुष्टि की गई जानकारी: FPI की बिकवाली का दबाव, वित्त मंत्री द्वारा इस पर बहस जारी होने का बयान, और बाजार के जानकारों व निवेशकों से सुझाव मांगे जाने की बात आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज है।
- अज्ञात पहलू: LTCG या STT में वास्तव में कितनी कटौती होगी या यह बदलाव आगामी बजट में लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
व्यावहारिक निहितार्थ और सरकारी चुनौतियां: वित्तीय वर्ष 2024-25 में LTCG से सरकार को 1.3 लाख करोड़ रुपये की आय हुई थी। जानकारों का मानना है कि कर दरों में किसी भी प्रकार की ढील देने से पहले सरकारी राजकोष पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना होगा। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण फर्टिलाइजर सब्सिडी का बढ़ा हुआ बोझ और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए आवश्यक फंड जैसी प्राथमिकताएं भी सरकार के सामने हैं।
पाठक मूल घोषणाओं और विस्तृत जानकारी के लिए [नवभारत टाइम्स की मूल रिपोर्ट](https://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/fpi-selling-put-pressure-on-govt-mulls-cut-ltcg-stt-rates-to-boost-sentiments/articleshow/135239546.cms) का अवलोकन कर सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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