वर्ष 1977 के राजनीतिक बदलाव और विदेशी कंपनियों के हटने के बाद कैसे आई थी 'डबल सेवन' कोला
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भारतीय पेयों के बाजार के इतिहास में 1970 के दशक का अंत एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, जब नीतिगत बदलावों और विनियामक नियमों के चलते वैश्विक ब्रांड कोका-कोला को देश छोड़ना पड़ा था और उसकी जगह देश की पहली सरकारी स्वदेशी ड्रिंक 'डबल सेवन' को लॉन्च किया गया था।
साल 1977 की पृष्ठभूमि और नीतियां
वर्ष 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी। इस दौरान विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) के नियमों का हवाला देकर विदेशी कंपनियों पर शिकंजा कसा गया, जिसमें कोका-कोला और आईबीएम जैसी कंपनियां शामिल थीं। तत्कालीन उद्योग मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस चाहते थे कि कोका-कोला अपनी हिस्सेदारी घटाए और भारतीय शेयरधारकों के साथ अपना सीक्रेट फॉर्मूला भी साझा करे। हालांकि, ट्रेड सीक्रेट का हवाला देते हुए कंपनी ने फॉर्मूला साझा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सरकार ने उसका लाइसेंस रद्द कर दिया।
'डबल सेवन' की लॉन्चिंग और तैयारी
इस राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के बीच स्वदेशी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'डबल सेवन' नाम से नई कोला ड्रिंक पेश की गई। इसका नामकरण 1977 के ऐतिहासिक राजनीतिक वर्ष से जोड़ा गया था।
- उत्पादन और जिम्मेदारी: इस ड्रिंक के निर्माण और मार्केटिंग की जिम्मेदारी सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी 'मॉडर्न फूड इंडस्ट्रीज' को सौंपी गई थी।
- फॉर्मूला विकास: इस पेय का फॉर्मूला मैसूर स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) द्वारा तैयार कराया गया था।
- सार्वजनिक प्रदर्शन: प्रगति मैदान के व्यापार मेले में इसे आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया गया था।
बाजार की चुनौतियां और अवसान
सरकारी समर्थन के बावजूद 'डबल सेवन' आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाई। इसे कैंपा कोला और थम्स अप जैसे ब्रांडों से कड़ी टक्कर मिली और यह बाजार में उस तरह की लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी। कारोबारी विश्लेषकों और प्रबंधन संस्थानों में इस ब्रांड को राजनीतिक प्रेरणा से शुरू हुई और बाजार प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाने वाली एक केस स्टडी के रूप में देखा जाता है।
राजनीतिक समीकरणों के बदलते दौर में, वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी के सत्ता में लौटने के बाद इस ब्रांड का सफर थम गया। इसके बाद 1991 के आर्थिक उदारीकरण के दौर के बाद 1993 में कोका-कोला ने भारतीय बाजार में दोबारा वापसी की।
व्यावहारिक निहितार्थ और सत्यापन
- ऐतिहासिक संदर्भ: यह घटना दर्शाती है कि कैसे पूर्ववर्ती नीतियों और विनियामक कानूनों ने भारतीय औद्योगिक और व्यावसायिक परिदृश्य को प्रभावित किया था।
- सत्यापन: इस कालखंड से जुड़े नीतिगत निर्णयों, FERA नियमों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की सत्यता की जांच राष्ट्रीय अभिलेखागार तथा सार्वजनिक विधाई अभिलेखों के माध्यम से की जा सकती है।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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