नए वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: कौए स्तनopियों की तुलना में दोगुनी तेजी से करते हैं दृश्य निर्णय
· GlobeWire Daily Science Desk · Source: arstechnica.com

चित्र: arstechnica.com — Creative Commons
परिचय और मुख्य निष्कर्ष
हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, कौए दृश्य जानकारी (visual information) का मूल्यांकन स्तनपाइयों (mammals) की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ ट्यूbingen के तंत्रिका जीवविज्ञानी (neurobiologist) एंड्रियास नीडर और उनके सहयोगी फिलिप श्मिटबॉउर द्वारा किए गए इस शोध से पता चलता है कि पक्षियों का मस्तिष्क प्राइमेट्स (बन्दरों और मनुष्यों) की तरह ही गणितीय तर्क का उपयोग करता है, भले ही दोनों की शारीरिक संरचना में काफी अंतर हो।
अध्ययन की प्रक्रिया और प्रयोग
शोधकर्ताओं ने दो पाले हुए कौओं को एक टच-स्क्रीन मॉनिटर के सामने बिठाया, जिस पर सफेद बिंदुओं का एक समूह दिखाई दे रहा था। इन बिंदुओं का एक हिस्सा बाएं, दाएं, ऊपर या नीचे की ओर बढ़ रहा था। पक्षियों का काम स्क्रीन के किनारे पर मौजूद लक्ष्यों में से सही दिशा में चोंच मारकर उसका जवाब देना था। सही उत्तर देने पर उन्हें भोजन के रूप में मीलवर्म (कीड़ा) मिलता था।
शोधकर्ताओं ने बिंदुओं के एक साथ चलने की गति को 81 प्रतिशत (जो बेहद आसान था) से घटाकर 3 प्रतिशत (जो लगभग शोर के बराबर था) तक कर दिया। इसके बावजूद दोनों पक्षियों ने मौके के हिसाब से बेहतर प्रदर्शन किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने कौओं के मस्तिष्क के एक हिस्से (NCL - nidopallium caudolaterale) से 248 न्यूरॉन्स की गतिविधि को रिकॉर्ड किया।
गति और सटीकता में तुलना
माप के अनुसार, बिंदुओं के दिखने से लेकर पक्षी के सिर को घुमाकर बटन पर चोंच मारने तक, कौओं को औसतन 235 मिलीसेकंड का समय लगा। इसके विपरीत, इसी तरह के कार्यों में बंदरों को लगभग 410, 490 और 600 मिलीसेकंड का समय लगा। खास बात यह है कि कौओं ने गति के चक्कर में अपनी सटीकता से समझौता नहीं किया; वे बंदरों और मनुष्यों की तरह ही सटीक थे।
पक्षियों के मस्तिष्क की तेज गति के संभावित कारण
शोधकर्ताओं का मानना है कि पक्षियों की यह तेज गति किसी एक प्रक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि कई जैविक प्रक्रियाओं का मेल है:
- छोटा आकार और कम दूरी: उड़ान भरने के वजन संबंधी प्रतिबंधों के कारण पक्षियों के मस्तिष्क में बहुत छोटे न्यूरॉन्स और छोटे एक्सॉन (axons) होते हैं, जिससे संकेतों को यात्रा करने में कम समय लगता है।
- उच्च शरीर का तापमान: मनुष्यों का तापमान लगभग 36.6°C होता है, जबकि पक्षियों का तापमान 41° से 42°C तक होता है। उच्च तापमान रासायनिक प्रक्रियाओं, आयन चैनलों और न्यूरोट्रांसमीटर की गति को तेज करता है।
सीमाएं और अनिश्चितताएं
इस अध्ययन में केवल दो पक्षियों को शामिल किया गया था, जो एक छोटा नमूना आकार है, हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जटिल न्यूरोलॉजिकल अध्ययनों के लिए मानक संख्या है। इसके अलावा, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह क्षमता अन्य पक्षियों में भी है या यह केवल कौवे जैसे अत्यधिक बुद्धिमान पक्षियों (कॉर्विडे परिवार) तक ही सीमित है।
व्यावहारिक निहितार्थ और जानकारी की पुष्टि
यह अध्ययन पक्षियों और स्तनपाइयों के बीच विकासात्मक भिन्नताओं और मस्तिष्क के काम करने के तरीकों पर नई रोशनी डालता है। पाठक मूल विवरण और वैज्ञानिक शोध पत्र की पुष्टि [Ars Technica रिपोर्ट](https://arstechnica.com/science/2026/10/crows-can-evaluate-visual-info-twice-as-fast-as-mammals/) और साइंस जर्नल (DOI: 10.1126/science.aed6459) के माध्यम से कर सकते हैं।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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