स्वास्थ्य और विज्ञान

क्लाइमेट वीक पैनल में एआई और डेटा केंद्रों को लेकर विरोध प्रदर्शन, जलवायु संकट और स्थानीय चिंताओं पर बहस तेज

· GlobeWire Daily Science Desk · Source: www.wired.com

क्लाइमेट वीक पैनल में एआई और डेटा केंद्रों को लेकर विरोध प्रदर्शन, जलवायु संकट और स्थानीय चिंताओं पर बहस तेज

चित्र: Molly Taft — Creative Commons

यह खबर शेयर करें
मुख्य बातेंहाल ही में आयोजित 'क्लाइमेट वीक' के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा केंद्रों से जुड़े एक पैनल डिस्कशन में उस समय अफरातफरी मच गई जब जलवायु कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। एक्सटिंक्शन रिबेलियन (Extinction Rebellion NYC) संगठन के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम क

हाल ही में आयोजित 'क्लाइमेट वीक' के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा केंद्रों से जुड़े एक पैनल डिस्कशन में उस समय अफरातफरी मच गई जब जलवायु कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। एक्सटिंक्शन रिबेलियन (Extinction Rebellion NYC) संगठन के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान खड़े होकर नारेबाजी की और फॉसिल फ्यूल (fracked gas) के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। सुरक्षा कर्मियों द्वारा कार्यकर्ताओं को बाहर निकाले जाने के बाद भी यह विरोध प्रदर्शन कुछ मिनटों तक जारी रहा।

स्थानीय चिंताएं बनाम वैश्विक जलवायु संकट

डेटा केंद्रों की बढ़ती संख्या को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध कोई नया नहीं है। अमेरिका के विभिन्न राज्यों में इसे लेकर मोरटोरियम (रोक) तक लगाए जा चुके हैं। पैनल में शामिल क्रूसे (Crusoe) कंपनी के सह-संस्थापक और अध्यक्ष कुल्ली कैवनेस और एमरल्ड एआई (Emerald AI) के वरुण शिवराम ने चर्चा के दौरान माना कि डेटा केंद्रों के कारण सार्वजनिक राय अभी काफी हद तक नकारात्मक बनी हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आम जनता और मतदाताओं के लिए जलवायु परिवर्तन से ज्यादा स्थानीय मुद्दे जैसे पानी की खपत, बिजली के बढ़ते बिल, स्थानीय हवा और ध्वनि प्रदूषण अधिक महत्वपूर्ण चिंताएं हैं। मिशिगन के 7वें congressional district से जुड़े विलियम लॉरेंस जैसे राजनीतिक चेहरे भी डेटा केंद्रों के खिलाफ अपने अभियानों में मुख्य रूप से वायु, जल और जीवन की गुणवत्ता जैसे स्थानीय मुद्दों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

ऊर्जा की बढ़ती मांग और फॉसिल फ्यूल का विस्तार

ब्लूमबर्गएनईएफ (BloombergNEF) के हालिया विश्लेषण के अनुसार, डेटा केंद्रों के कारण बिजली की वैश्विक मांग में भारी वृद्धि होने की संभावना है। वर्ष 2035 तक डेटा केंद्रों की हिस्सेदारी वैश्विक बिजली मांग का 5 प्रतिशत से अधिक हो सकती है, जो मौजूदा जरूरतों से लगभग तीन गुना है। इस अतिरिक्त मांग का एक बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस (natural gas) संयंत्रों के जरिए पूरा किए जाने की आशंका है, जिससे बिजली क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि यदि प्रस्तावित ऑन-साइट गैस पावर प्लांट बनाए जाते हैं, तो इससे अमेरिकी पावर सेक्टर का उत्सर्जन काफी बढ़ सकता है। हालांकि कुछ तकनीकी कंपनियां और स्टार्टअप्स इस ऊर्जा संकट से निपटने के लिए नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं, लेकिन डेटा केंद्रों का पर्यावरण पर पड़ने वाला दीर्घकालिक प्रभाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पाठकों के लिए मुख्य बातें और सत्यापन

  • पुष्ट तथ्य: क्लाइमेट वीक पैनल के दौरान एक्सटिंक्शन रिबेलियन के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया और सुरक्षा बलों ने उन्हें बाहर निकाला।
  • अस्पष्ट या अनिश्चित पहलू: क्या डेटा सेंटर कंपनियां समय रहते अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरी तरह से स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में बदल पाएंगी, यह अभी अनिश्चित है।
  • मूल स्रोत की जानकारी: इस खबर से जुड़े विस्तृत और मूल विवरण के लिए पाठक [Wired](https://www.wired.com/story/data-center-backlash-climate-reckoning/) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।
मूल स्रोत पढ़ें: The Data Center Backlash Should Also Be a Climate Reckoning. It Isn’t Yet

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

लेखक के बारे में

GlobeWire Daily Science Desk — प्रकाशित स्रोतों पर आधारित AI-सहायता प्राप्त खबरें।

और पढ़ें