उत्तराखंड में वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद रहने पर यूक्रेनी नागरिक को दो साल की जेल
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: timesofindia.indiatimes.com

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अदालत का फैसला और सजा
उत्तराखंड के बागेश्वर की एक अदालत ने वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रहने के आरोप में यूक्रेन के नागरिक मैक्सिम स्टारचेंको को दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) संदीप कुमार तिवारी ने 24 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाया और 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त छह महीने की जेल काटनी होगी।
घटना की पृष्ठभूमि
यह मामला 24 मई को प्रकाश में आया, जब कपकोट पुलिस को डौला गांव में एक घायल विदेशी नागरिक के बारे में सूचना मिली। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बागेश्वर के जिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि उनका भारतीय पर्यटक वीज़ा 16 अप्रैल, 2025 को ही समाप्त हो चुका था। साथ ही, स्थानीय खुफिया इकाई को उनके नाम से 'फॉर्म-सी' (Form-C) जमा करने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जो भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों के लिए अनिवार्य है।
कानूनी कार्यवाही और बचाव
सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) द्वारा जारी शरणार्थी कार्ड है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक UNHCR शरणार्थी कार्ड भारत में प्रवेश और रहने के लिए आवश्यक वैध वीज़ा का विकल्प नहीं हो सकता है। अदालत ने आदेश दिया है कि सुनवाई के दौरान आरोपी द्वारा काटी गई पांच महीने की अवधि को उसकी दो साल की सजा में समायोजित किया जाएगा। अपनी सजा पूरी करने के बाद, उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत यूक्रेन वापस भेजा जाएगा।
महत्वपूर्ण जानकारी
यह मामला भारत के 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट' के कड़े कार्यान्वयन को दर्शाता है। विदेशी नागरिकों के लिए निम्नलिखित बातें अनिवार्य हैं:
- अपनी यात्रा के दौरान वीज़ा की वैधता बनाए रखना।
- आवास इकाइयों में ठहरने पर 'फॉर्म-सी' पंजीकरण सुनिश्चित करना।
- यह समझना कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के दस्तावेज़ भारतीय वीज़ा का कानूनी विकल्प नहीं हैं।
वीज़ा विस्तार और कानूनी निवास संबंधी आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया भारतीय गृह मंत्रालय या आव्रजन ब्यूरो (Bureau of Immigration) की वेबसाइट देखें।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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