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केरल की शिक्षिका के.आर. उषा कुमारी का संघर्ष: दुर्गम रास्तों से सफाईकर्मी बनने तक की यात्रा

· GlobeWire Daily World Desk · Source: timesofindia.indiatimes.com

केरल की शिक्षिका के.आर. उषा कुमारी का संघर्ष: दुर्गम रास्तों से सफाईकर्मी बनने तक की यात्रा

चित्र: The Times of India · स्रोत चित्र के उपयोग अधिकार स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं · चित्र स्रोत · स्रोत चित्र 16:9 अनुपात में काटा गया

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मुख्य बातें जनजातीय शिक्षा के लिए समर्पित एक लंबा सफर केरल की शिक्षिका के.आर. उषा कुमारी का नाम पिछले दो दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण समर्पण के लिए जाना जाता है। 1968 में जन्मी उषा कुमारी ने अपनी शिक्षण यात्रा 1999 में शुरू की थी। 2002 में, उन्होंने तिरुवनंतपुरम के

जनजातीय शिक्षा के लिए समर्पित एक लंबा सफर

केरल की शिक्षिका के.आर. उषा कुमारी का नाम पिछले दो दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण समर्पण के लिए जाना जाता है। 1968 में जन्मी उषा कुमारी ने अपनी शिक्षण यात्रा 1999 में शुरू की थी। 2002 में, उन्होंने तिरुवनंतपुरम के अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर स्थित कुन्नथुमाला के 'अगस्त्य मल्टी ग्रेड लर्निंग सेंटर' में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।

चुनौतियों भरा दैनिक मार्ग

कुन्नथुमाला स्थित स्कूल तक पहुँचना एक बेहद कठिन कार्य था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके दैनिक सफर में निम्नलिखित चरण शामिल थे:

  • घर से कुम्बिक्कल कडावु तक दोपहिया वाहन की यात्रा।
  • एक छोटी लकड़ी की नाव से नदी पार करना।
  • घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच से लगभग आठ किलोमीटर की पैदल यात्रा।

उषा कुमारी ने न केवल बच्चों को सभी विषय पढ़ाए, बल्कि प्रशासनिक कार्यों और बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करने जैसी जिम्मेदारियां भी अकेले संभालीं। अपने इस कार्य के लिए उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक दर्जन से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

शिक्षण से प्रशासनिक बदलाव

मार्च 2022 में केरल सरकार द्वारा राज्य भर के 271 मल्टी ग्रेड लर्निंग सेंटर्स को बंद करने का निर्णय लेने के बाद उनकी स्थिति बदल गई। इस नीतिगत बदलाव के कारण उषा कुमारी सहित कई शिक्षकों को अन्य सरकारी स्कूलों में 'स्वीपर' (सफाईकर्मी) के पद पर पुनर्नियुक्त किया गया। जून 2022 से वे तिरुवनंतपुरम के पीएसएनएम गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत हैं।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की मांग

यद्यपि उषा कुमारी ने स्वीकार किया है कि वे अपने छात्रों को याद करती हैं, उन्होंने नई नौकरी को वित्तीय सुरक्षा के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी 23 वर्षों की शिक्षण सेवा को पेंशन और वरिष्ठता तय करते समय ध्यान में रखा जाए। उनकी कहानी भारत के उन दूरस्थ इलाकों के शिक्षकों के संघर्ष को दर्शाती है, जो संसाधनों की कमी और अनिश्चित रोजगार के बावजूद बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहे।

इस जानकारी की पुष्टि कैसे करें

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सरकारी नीतिगत घोषणाओं पर आधारित है। पाठक अधिक जानकारी के लिए 'टाइम्स ऑफ इंडिया' या 'पीटीआई' (PTI) के 2022 के आर्काइव्स और केरल सरकार के शिक्षा विभाग की आधिकारिक घोषणाओं को देख सकते हैं।

मूल स्रोत पढ़ें: Kerala teacher who boated and trekked 23 years to teach tribal kids

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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