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वित्त मंत्रालय ने बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा और सुधारों का सुझाव देने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया

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· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.business-standard.com

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मुख्य बातेंकेंद्रीय वित्त मंत्रालय ने देश के बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा करने और संरचनात्मक, विनियामक तथा विधायी सुधारों का सुझाव देने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पैनल का उद्देश्य भारतीय बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और बढ़ती अर्थव्यवस्था की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है।
वित्त मंत्रालय ने बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा और सुधारों का सुझाव देने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया

GlobeWire Daily की मूल सांकेतिक तस्वीर — घटना की वास्तविक फोटो नहीं।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने देश के बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा करने और संरचनात्मक, विनियामक तथा विधायी सुधारों का सुझाव देने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पैनल का उद्देश्य भारतीय बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और बढ़ती अर्थव्यवस्था की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है।

समिति का नेतृत्व और संरचना

  • अध्यक्ष: सुरेश एन. पटेल, पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और आंध्रा बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी।
  • सदस्य: शिरीष चंद्र मुर्मू (आरबीआई डिप्टी गवर्नर), पद्माजा चंद्रू (इंडियन बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ), और एन. एस. विश्वनाथन (आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर)।
  • सदस्य सचिव: वित्तीय सेवा विभाग में संयुक्त सचिव (बैंकिंग)।
  • समय-सीमा: पैनल को अपना काम पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है, जिसकी समय-सीमा अप्रैल 2027 तय की गई है।

समीक्षा के प्रमुख क्षेत्र

इस समिति की घोषणा सबसे पहले केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की थी। इसके व्यापक संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण (पीएसएल) और लीड बैंक योजना: समावेशी ऋण वितरण के लिए प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और समन्वय का आकलन करना।
  • पूंजी आवश्यकताएं: ऋण वृद्धि बनाए रखने के लिए बैंकों, विकास वित्त संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) हेतु धन के स्रोतों का मूल्यांकन करना।
  • पूंजी की लागत: व्यवसायों के लिए पूंजी की लागत में अंतर की जांच करना और निजी निवेश को बढ़ावा देने के उपाय सुझाना।
  • नियामक और कानूनी ढांचा: दक्षता और पहुंच में सुधार के लिए वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों को नियंत्रित करने वाले नियमों की समीक्षा करना।
  • प्रौद्योगिकी और प्रतिभा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल नवाचार, साइबर जोखिम सुरक्षा और कार्यबल क्षमता निर्माण के लिए एक रोडमैप तैयार करना।

उद्योग संदर्भ और दृष्टिकोण

हालांकि औपचारिक संदर्भ की शर्तों में स्पष्ट रूप से बैंकिंग समेकन का आदेश नहीं दिया गया है, लेकिन वित्तीय संस्थानों के पैमाने और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति के संबंध में चर्चाओं ने संभावित संरचनात्मक परिवर्तनों को रेखांकित किया है। इक्रा और पीडब्ल्यूसी इंडिया के विशेषज्ञों सहित उद्योग जगत के जानकारों ने उल्लेख किया है कि अगली पीढ़ी की ऋण मांगों को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक पूंजी आवश्यकताएं, डिजिटल परिवर्तन और जोखिम प्रबंधन महत्वपूर्ण होंगे।

हितधारक वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक घोषणाओं के माध्यम से विवरण की पुष्टि कर सकते हैं।

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मूल स्रोत पढ़ें: FinMin sets up high-level panel to review banking sector, suggest reforms - Business Standard

AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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