ISRO के कर्मचारियों ने निजीकरण को लेकर सरकार से मांगी स्पष्टता, जानिए क्या हैं चिंताएं
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: news.abplive.com

चित्र: Deepika Bhatt · चित्र स्रोत · स्रोत चित्र 16:9 अनुपात में काटा गया
इसरो कर्मचारियों की चिंताएं और ज्ञापन
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के बीच, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विभिन्न केंद्रों के कर्मचारी संघों ने सरकार और संगठन के शीर्ष नेतृत्व से स्पष्टता की मांग की है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 सितंबर को GSLV F-17/EOS-05 मिशन की सफल लॉन्चिंग के कुछ दिनों बाद, इसरो के प्रमुख केंद्रों के कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इसरो चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को एक पत्र लिखा है।
यह पांच पन्नों का पत्र विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), यू आर राव उपग्रह केंद्र (URSC), लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC), नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) और इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) सहित नौ प्रमुख केंद्रों के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित है। ये संघ मिलकर इसरो के कुल 18,100 कर्मचारियों में से लगभग 5,000 यानी करीब 27% कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
निजीकरण का दायरा और नीतियां
कर्मचारियों का यह विरोध अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश मात्र को लेकर नहीं है। वर्ष 2020 से सरकार अंतरिक्ष इकोसिस्टम में निजी क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। इस नीति का उद्देश्य निजी कंपनियों को अंतरिक्ष प्रणालियों के डिजाइन, निर्माण और संचालन में सक्षम बनाना है, जबकि इसरो का ध्यान मुख्य रूप से अनुसंधान और उन्नत प्रौद्योगिकी विकास पर केंद्रित रहना है।
कर्मचारी संघों ने स्पष्ट किया है कि वे वैध निजी भागीदारी और व्यावसायीकरण का समर्थन करते हैं। उनकी मुख्य चिंता यह है कि जो गतिविधियां वर्तमान में इसरो के भीतर की जा रही हैं, उन्हें धीरे-धीरे संगठन के बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है। यह चिंता तब और बढ़ गई जब IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयंका ने एक सम्मेलन में यह बयान दिया कि इसरो अंततः लॉन्च वाहनों का निर्माण बंद कर देगा, और यह कार्य निजी कंपनियों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा किया जाएगा।
स्थानांतरित हो रही गतिविधियां और मुख्य मुद्दे
कर्मचारी संघों ने अपने पत्र में SSLV तकनीक और उत्पादन को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख किया है। इसके अलावा, LVM3 (भारत का सबसे बड़ा लॉन्च वाहन) से संबंधित तकनीक के हस्तांतरण की प्रक्रिया और PSLV से जुड़े ऐसे ही प्रयासों का भी जिक्र किया गया है। इसके अतिरिक्त, रूटीन उपग्रह निर्माण और तमिलनाडु के कुलासेकरपट्टिनम में विकसित किए जा रहे नए स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स को निजी खिलाड़ियों के लिए खोले जाने की खबरों पर भी चिंता जताई गई है।
संघों की मांग है कि एक स्पष्ट नीति परिभाषित की जाए जिसमें यह तय हो कि कौन सी जिम्मेदारियां इसरो के पास रहेंगी और कहां से निजी भागीदारी शुरू होगी। उनका तर्क है कि रॉकेट विकास केवल विनिर्माण नहीं है, बल्कि इसमें दशकों का संस्थागत ज्ञान, सुरक्षा अभ्यास और तकनीकी विशेषज्ञता शामिल है।
व्यावहारिक निहितार्थ और पाठकों के लिए जानकारी
पुष्ट तथ्य (Confirmed Facts):
- इसरो के नौ कर्मचारी संघों ने इसरो चेयरमैन को पांच पन्नों का पत्र लिखकर निजीकरण पर स्पष्टता मांगी है।
- ये संघ लगभग 5,000 कर्मचारियों (कुल कार्यबल का लगभग 27%) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- चर्चा का मुख्य विषय लॉन्च वाहनों और उपग्रहों के निर्माण का निजी कंपनियों या अन्य संस्थाओं की ओर संभावित स्थानांतरण है।
अनिश्चितताएं (Uncertainties):
- यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में इसरो की विनिर्माण गतिविधियों को किस सीमा तक और किस समयावधि में पूरी तरह से निजी हाथों या अन्य पीएसयू को सौंपा जाएगा।
- कर्मचारियों के भविष्य, आंतरिक कार्यभार और पुनर्नियोजन को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय अभी सामने नहीं आया है।
पाठक कैसे सत्यापित करें: पाठक इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए मूल आधिकारिक रिपोर्ट और अपडेट्स 'एबीपी लाइव' की वेबसाइट पर देख सकते हैं। मूल स्रोत का लिंक यहां उपलब्ध है: ABPLive News।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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