दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं सुप्रीम कोर्ट, संतुलित आदेश के दिए संकेत
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चित्र: Nipun Sehgal · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation
प्रदूषण और त्योहारी भावना के बीच संतुलन पर जोर
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह दिल्ली-NCR क्षेत्र में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध (ब्लैंकेट बैन) लगाने के पक्ष में नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों के अनुसार, न्यायपालिका का उद्देश्य एक ऐसा संतुलित आदेश पारित करना है जो पर्यावरण प्रदूषण की चिंताओं के साथ-साथ जनता की त्योहारी भावना का भी ध्यान रखे।
मामले पर विचार करते हुए, पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को निर्धारित नियमों का उल्लंघन करके पटाखे बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने जिम्मेदार तरीके से पटाखों के उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए क्रिकेटर विराट कोहली जैसी प्रमुख हस्तियों को शामिल करने का सुझाव भी दिया।
अनुपालन और प्रशासनिक चुनौतियों पर सवाल
कार्यवाही के दौरान, अदालत ने कहा कि त्योहारों के दौरान लोगों के उत्साह को कम नहीं किया जाना चाहिए, और यह भी देखा कि युवा पीढ़ी पहले से ही पर्यावरण संबंधी चिंताओं से अवगत है। हालांकि, पीठ ने हर साल बार-बार आदेश जारी करने की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया, और यह रेखांकित किया कि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन कराना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
- बार-बार होने वाली कार्यवाही: अदालत ने टिप्पणी की कि उसके निर्देशों का पालन होने से ज्यादा उनका उल्लंघन किया जाता है, जिससे यह मामला लगभग अकादमिक हो गया है।
- स्थायी समाधान: न्यायाधीशों ने संकेत दिया कि केवल प्रतिबंध लगाना ही क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता संकट का कोई स्थायी समाधान प्रतीत नहीं होता है।
- प्रशासनिक उपाय: दिल्ली-NCR के लगातार बने हुए प्रदूषण स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए, अदालत ने समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उच्च प्रशासनिक स्तर पर उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।
दिल्ली सरकार के प्रस्ताव और स्वास्थ्य संबंधी खतरे
सुनवाई के दौरान, दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वह प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रति गंभीर है और उसने कई प्रस्तावित उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की। रिपोर्ट किए गए इन उपायों में शामिल हैं:
- BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा न करने वाले पुराने वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना।
- यातायात को नियंत्रित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव करना।
- रणनीतिक शहरी क्षेत्रों में स्मॉग गन तैनात करना।
इस बीच, अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्यायमित्र (amicus curiae) ने पटाखों के धुएं से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से पार्टिकुलेट मैटर (PM) के उत्सर्जन पर। अदालत को दी गई जानकारी में बताया गया कि PM2.5 सहित सूक्ष्म कण फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं और रक्तप्रवाह में जा सकते हैं, जिससे अन्य अंगों पर असर पड़ सकता है।
amicus curiae ने यह भी स्पष्ट किया कि तथाकथित "ग्रीन क्रैकर्स" पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त नहीं हैं। हालांकि वे पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम उत्सर्जन पैदा करते हैं, फिर भी वे वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं और हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
मूल घोषणा की सत्यता की जांच कैसे करें
न्यायिक आदेशों, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और आधिकारिक दिशानिर्देशों से संबंधित सत्यापित अपडेट चाहने वाले पाठकों को भारत के सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक पोर्टल की सूचनाओं या अधिकृत सरकारी प्रेस विज्ञпियों का संदर्भ लेना चाहिए।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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