ऑक्सफोर्ड अध्ययन: जेट लैग की तरह शरीर की आंतरिक घड़ी बिगड़ने से रास्ता भटक जाते हैं समुद्री पक्षी
· GlobeWire Daily Science Desk · Source: www.theguardian.com

चित्र: www.theguardian.com · चित्र स्रोत · स्रोत चित्र 16:9 अनुपात में काटा गया
परिचय और मुख्य निष्कर्ष
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि समुद्री पक्षी भी इंसानों की तरह 'जेट लैग' (जैविक घड़ी का असंतुलन) का शिकार होते हैं। जब ये पक्षी लंबी दूरी की उड़ानों के बाद अपने घर लौटते हैं, तो शरीर की आंतरिक घड़ी और स्थानीय समय के बीच तालमेल बिगड़ने के कारण वे अपने रास्ते से भटक सकते हैं। यह शोध विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन और ट्रैकिंग डेटा
शोधकर्ताओं ने यूके के पश्चिमी तट पर पाए जाने वाले 'मैन्क्स शीयरवाटर' (Manx shearwaters) पक्षियों पर पिछले 20 वर्षों के जीपीएस ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण किया। अटलांटिक महासागर के ऊपर भोजन की तलाश के बाद जब ये पक्षी अपने उपनिवेश (कॉलोनी) लौट रहे थे, तो उनकी पूर्व दिशा की तीव्र उड़ानों ने उनके समय और दिशा के ज्ञान को प्रभावित किया।
विश्लेषण से पता चला कि जब ये पक्षी देशांतर रेखाओं को पार करते हुए पूर्व की ओर उड़ते हैं, तो उनकी आंतरिक घड़ी स्थानीय समय से लगभग एक घंटा पीछे हो जाती है। व्यवहार और संवेदी पारिस्थितिकीविद् डॉ. पैट्रिक लेविन के अनुसार, यह पक्षियों में जेट लैग जैसी स्थिति पैदा करता है, जिससे वे अपनी तयशुदा दिशा से भटक जाते हैं।
पक्षियों पर इसका असर और अनुभव का महत्व
अध्ययन के अनुसार, वयस्क और अनुभवी पक्षियों पर इसका प्रभाव बहुत सीमित होता है। वयस्क पक्षी उड़ान के दौरान अपनी दिशा को सुधारने में सक्षम होते हैं। अधिकतम स्थिति में वे करीब 15 डिग्री तक अपने रास्ते से भटकते हैं, जिसे वे सुधार लेते हैं। 600 मील की कुल यात्रा में इससे केवल लगभग 3 मील (लगभग 5 किलोमीटर) की अतिरिक्त दूरी जुड़ती है।
हालांकि, कम अनुभवी या पहली बार भोजन की तलाश में निकले युवा पक्षियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उनके भटककर सैकड़ों मील दूर निकल जाने का जोखिम रहता है क्योंकि उनके पास रास्ता सुधारने के लिए 'मैप सेंस' का अनुभव कम होता है।
सूरज का कंपास और जैविक घड़ियाँ
कई अन्य जानवरों की तरह शीयरवाटर पक्षी भी सूरज को दिशासूचक (कंपास) के रूप में उपयोग करते हैं। चूंकि पृथ्वी के घूमने के साथ सूरज आकाश में अपनी स्थिति बदलता है, इसलिए सही दिशा का अनुमान लगाने के लिए पक्षियों को दिन के समय का हिसाब रखने के लिए अपनी जैविक घड़ी की आवश्यकता होती है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि स्थानीय समय और आंतरिक घड़ी के बीच का यह असंतुलन पक्षियों को उस समय भी भटका सकता है जब वे तटरेखा के सहारे उड़ रहे होते हैं, जहां स्थलचिह्न (लैंडमार्क) उनका मार्गदर्शन कर सकते थे। यह इस बात की पुष्टि करता है कि दिशा तय करने में सूरज की स्थिति केंद्रीय भूमिका निभाती है।
व्यावहारिक निहितार्थ और क्या अज्ञात है
इस अध्ययन के व्यावहारिक निहितार्थ यह समझने में मदद करते हैं कि जंगली जानवरों के व्यवहार में जैविक लय और आंतरिक घड़ियाँ कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- पुष्ट तथ्य: अध्ययन के अनुसार वयस्क पक्षियों में यह विचलन बहुत कम होता है (लगभग 1,000 किलोमीटर की यात्रा में 5 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी)।
- अज्ञात पहलू: यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि युवा पक्षियों द्वारा तय किए गए इन अतिरिक्त रास्तों या बड़ी त्रुटियों के दीर्घकालिक परिणाम क्या होते हैं।
पाठक इस मूल अध्ययन और वैज्ञानिक घोषणा के बारे में अधिक जानकारी के लिए 'द गार्डियन' की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट और 'साइंस' पत्रिका में छपे मूल शोध पत्र को देख सकते हैं: https://www.theguardian.com/science/2026/oct/29/jet-lag-throws-seabirds-off-course-nature
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
और पढ़ें
संबंधित खबरें
प्रकाशन के समय उपलब्ध संबंधित रिपोर्ट।
अंधेरे में डूबता पुर्तगाल का कोरवो द्वीप: क्यों हर साल बुलाई जाती है कृत्रिम रोशनी?
नए वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: कौए स्तनopियों की तुलना में दोगुनी तेजी से करते हैं दृश्य निर्णय
लगातार रक्तचाप की दवा लेने से हृदयाघात और स्ट्रोक का जोखिम 11% कम होता है, अध्ययन में पाया गया
नye अध्ययन का दावा: क्या जीवाश्म ईंधनों के जलने से टल गई थी एक और हिमयुग की शुरुआत?
लंबी उम्र और इजरायली खान-पान: जानिए उन 5 खाद्य आदतों को जो स्वस्थ जीवन से जुड़ी हैं
एम्स दिल्ली के प्रोफेसर के अनुसार अगले पांच वर्षों में भारत में बाल कैंसर से बचने की दर में हो सकता है सुधार