संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की नई रिपोर्ट: क्या 1.5 डिग्री सेल्सियस ग्लोबल वार्मिंग का लक्ष्य अब व्यावहारिक नहीं रहा?
· GlobeWire Daily Science Desk · Source: arstechnica.com

चित्र: arstechnica.com — Creative Commons
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर वैश्विक तापमान को सीमित रखने का मूल लक्ष्य अब व्यावहारिक रूप से संभव नहीं प्रतीत होता है। दशकों की अपर्याप्त जलवायु कार्रवाई के कारण इस सीमा को पार करना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि तापमान वृद्धि की मात्रा और अवधि को न्यूनतम रखकर सदी के अंत तक स्थिति को संभाला जा सकता है।
1.5 डिग्री की सीमा और वर्तमान स्थितियां
वर्ष 2015 के पेरिस समझौते में लगभग सभी देशों ने वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का प्रयास करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, अधिकांश देशों की नीतियां इस वादे के अनुरूप नहीं रहीं और लगातार बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्रह व्यावहारिक रूप से इस सीमा के करीब पहुंच चुका है। संयुक्त राष्ट्र तापमान का आकलन दशकों के औसत के आधार पर करता है, जिसके तहत तकनीकी रूप से इस सीमा को पूरी तरह पार करने की पुष्टि होना बाकी है, लेकिन लगातार ऊंचे बने तापमान के चलते यह दौर शुरू हो चुका है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और नई रणनीतियां
UNEP का नया विश्लेषण बताता है कि यदि मौजूदा नीतियां जारी रहीं, तो सदी के अंत तक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2.8 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए रिपोर्ट ने नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
- उत्सर्जन में भारी कटौती: 2040 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 70 प्रतिशत तक की कमी लानी होगी।
- जीवाश्म ईंधन का चरणबद्ध समापन: 2035 तक बिजली उत्पादन में कोयले के उपयोग को 75 प्रतिशत तक कम करना और 2040 तक इसे पूरी तरह समाप्त करना होगा। तेल और गैस के उपयोग में भी क्रमशः 30 और 35 प्रतिशत की कटौती आवश्यक है।
- कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन: सदी के अंत तक सैकड़ों गीगाटन (लगभग 320 गीगाटन) कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से बाहर निकालना होगा, जो वर्तमान तकनीक के लिए एक अत्यंत कठिन चुनौती है।
व्यावहारिक निहितार्थ और अनिश्चितताएं
रिपोर्ट के अनुसार, तापमान में होने वाली प्रत्येक अतिरिक्त वृद्धि बर्फ की चादरों, पर्माफ्रॉस्ट, महासागरीय धाराओं और मूंगा प्रणालियों में अपरिवर्तनीय बदलावों के जोखिम को बढ़ाती है। वर्तमान नीतियां 2035 तक उत्सर्जन को केवल 12 प्रतिशत तक ही कम कर पाएंगी, जो आवश्यक लक्ष्य से काफी पीछे हैं। सौर और पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण यह ग्रिड की कुल जरूरत के अनुपात में पिछड़ रही है।
पाठक क्या सत्यापित कर सकते हैं?
पाठक संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इस नवीनतम रिपोर्ट और उसके विस्तृत आंकड़ों की जांच कर सकते हैं। मूल स्रोत और विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक यूआरएल यहाँ देखा जा सकता है: [Ars Technica Report](https://arstechnica.com/science/2026/10/un-accepts-the-obvious-were-not-going-to-avoid-a-1-5o-c-warming/)।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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