एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित: टेस्ट पायलट से वायुसेना में प्रमुख पदों तक के सफर का परिचय
· GlobeWire Daily Editorial Desk · Source: www.amarujala.com

चित्र: Amar Ujala · चित्र स्रोत · Resized and letterboxed to 16:9; no AI generation
परिचय
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रक्षा विवरणों के अनुसार, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना (IAF) में एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट (एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट) से लेकर विभिन्न उच्च पदों तक की जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनके करियर और सेवा रिकॉर्ड में कई प्रमुख अभियानों और तकनीकी परियोजनाओं का उल्लेख मिलता है।
उड़ान अनुभव और विमान संचालन
आधिकारिक प्रोफाइल्स के मुताबिक, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं। उनके पास 3,300 से अधिक घंटों का उड़ान अनुभव दर्ज है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने 20 से अधिक प्रकार के विमानों का संचालन किया है, जिनमें शामिल हैं:
- फाइटर एयरक्राफ्ट: मिराज-2000, मिग-21 और इसके अन्य संस्करण, जगुआर, और एलसीए तेजस।
- परिवहन और ट्रेनर विमान: एचपीटी-32, एएन-32, एवरो, किरण, और हॉक।
- अन्य विमान: आईएल-78।
प्रमुख कमान और प्रशासनिक जिम्मेदारियां
विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स के अनुसार, एयर मार्शल दीक्षित ने वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है:
- शीर्ष पद: उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) और वायुसेना के उप-प्रमुख के रूप में सेवाएं दी हैं।
- कमान अनुभव: वे सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम पंक्ति के फाइटर बेस और दक्षिणी क्षेत्र में फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली है।
- मुख्यालय स्तर की भूमिकाएं: वायु मुख्यालय में वे असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे पदों पर रहे।
- विशिष्ट नियुक्तियां: उन्होंने मिराज-2000 स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया तथा फ्रांस से नए मिराज विमानों की भारत डिलीवरी और इंडक्शन प्रक्रिया का संचालन किया। वे बंगलूरू स्थित एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) में फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर भी रहे।
सैन्य अभियान और तकनीकी योगदान
सार्वजनिक सेवा रिकॉर्ड के अनुसार, उनके कार्यकाल में कई सैन्य अभियानों और रक्षा परियोजनाओं से जुड़ाव रहा है:
- सैन्य अभियान: रिपोर्ट्स में उल्लेख है कि उन्होंने 1999 के करगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक, कोप-इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर में सक्रिय रूप से भाग लिया।
- स्वदेशी पहल: उन्हें एलसीए तेजस और अन्य स्वदेशी एयरोस्पेस परियोजनाओं तथा 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के समर्थकों में गिना जाता है।
- आधुनिकरण और परीक्षण: एएसटीई में रहते हुए उन्होंने जगुआर और मिग-27 फाइटर जेट्स के एविओनिक्स अपग्रेड प्रोग्राम में भूमिका निभाई। डायरेक्टर ऑफ एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के रूप में उन्होंने लड़ाकू विमानों के तकनीकी मूल्यांकन और परीक्षणों की योजना में योगदान दिया।
- रणनीतिक रूपरेखा: सरकारी घोषणाओं के अनुसार, सीआईएससी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान संयुक्त सैन्य सिद्धांतों, 'रणसंवाद' और 'डिफेंस फोर्सेस विजन 2047' रोड्समैप की रूपरेखा तैयार करने में प्रगति हुई।
सूचना की पुष्टि और स्रोत
भारतीय वायुसेना से जुड़ी आधिकारिक नियुक्तियों, रक्षा नीतियों और अपडेट्स की सत्यता की जांच के लिए पाठकों को रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना के आधिकारिक पोर्टलों का रुख करना चाहिए।
AI की सहायता से तैयार रिपोर्ट; मूल स्रोत के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
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